Invesco India Arbitrage Fund ने पिछले तीन महीनों में **1.6%** का शानदार रिटर्न देकर अपने सेक्टर में टॉप किया है। HDFC और ICICI Pru Arbitrage Fund जैसे फंड्स भी इसी रेंज में रहे। ये फंड्स अक्सर कम जोखिम में पैसा लगाने के लिए इस्तेमाल होते हैं, लेकिन इनकी परफॉरमेंस मार्केट की वोलैटिलिटी और समय-सीमा पर निर्भर करती है।
Invesco India Arbitrage Fund का जलवा!
Invesco India Arbitrage Fund ने अपने सेक्टर के बड़े फंड्स को पीछे छोड़ते हुए 1.6% का सबसे ज़्यादा रिटर्न दर्ज किया है। यह आंकड़ा 6 जुलाई 2026 को खत्म हुए तीन महीनों का है। HDFC Arbitrage Fund और ICICI Prudential Arbitrage Fund ने भी इसी अवधि में 1.6% का ही रिटर्न दिया है। यह डेटा उन फंड्स के लिए है जिनका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है।
लंबी अवधि में कौन बेहतर?
हालांकि, यह सिर्फ़ 3 महीने का आंकड़ा है। लंबी अवधि में परफॉरमेंस बदल सकती है। उदाहरण के लिए, Kotak Arbitrage Fund के पास इस सेक्टर में सबसे बड़ा ₹72,000 करोड़ से ज़्यादा का कॉर्पस है। 6 महीने की अवधि में, Kotak Arbitrage Fund 3.1% रिटर्न के साथ सबसे आगे रहा। वहीं, 3 साल की अवधि में इस फंड ने सालाना 7.0% का रिटर्न दिया है, जो टॉप 5 फंड्स में सबसे ज़्यादा है।
आर्बिट्रेज फंड्स कैसे काम करते हैं?
आर्बिट्रेज फंड्स शेयर बाज़ार के कैश और डेरिवेटिव्स सेगमेंट के बीच कीमतों के अंतर का फायदा उठाते हैं। इनका मकसद मार्केट-न्यूट्रल रहकर स्टेबल रिटर्न देना होता है, न कि बहुत ज़्यादा कैपिटल एप्रिसिएशन। इसलिए, इन्हें अक्सर लिक्विड म्यूचुअल फंड्स या सेविंग्स अकाउंट्स के मुकाबले कम जोखिम वाला विकल्प माना जाता है, खासकर छोटे समय के लिए पैसा लगाने वालों के लिए।
किन बातों का रखें ध्यान?
निवेशकों को यह समझना ज़रूरी है कि इन फंड्स का रिटर्न मार्केट लिक्विडिटी और कैश व फ्यूचर्स की कीमतों के बीच के स्प्रेड पर बहुत निर्भर करता है। जब मार्केट में वोलैटिलिटी ज़्यादा होती है, तो आर्बिट्रेज के मौके बढ़ते हैं और फंड को फायदा हो सकता है। वहीं, शांत बाज़ारों में स्प्रेड कम हो सकते हैं, जिससे फंड के रिटर्न पर असर पड़ सकता है।
सिर्फ़ 3 महीने के आंकड़ों से आगे देखना महत्वपूर्ण है। जो फंड छोटी अवधि में अच्छा प्रदर्शन करता है, ज़रूरी नहीं कि वह 1, 3 या 5 साल में भी लीड करे। अलग-अलग टाइमलाइन पर परफॉरमेंस की तुलना करना और फंड के बेंचमार्क के मुकाबले उसकी कंसिस्टेंसी, साथ ही एक्सपेंस रेश्यो (जो सीधे नेट रिटर्न को प्रभावित करता है) की जांच करना ज़रूरी है। इन फंड्स का भविष्य मार्केट एक्टिविटी और फंड मैनेजरों की प्राइस गैप को भुनाने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
