Indo-Pacific ETFs: निवेशकों की रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी, पहली छमाही में आया **$128.5 अरब** का निवेश

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indo-Pacific ETFs: निवेशकों की रिकॉर्ड तोड़ खरीदारी, पहली छमाही में आया **$128.5 अरब** का निवेश

साल 2026 की पहली छमाही में इंडो-पैसिफिक रीजन के एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) में निवेशकों ने रिकॉर्ड **$128.5 अरब** का निवेश किया है। इस भारी उछाल के साथ कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर **$2.7 ट्रिलियन** के स्तर पर पहुंच गया है।

इंडो-पैसिफिक इन्वेस्टमेंट मार्केट में साल 2026 के पहले 6 महीनों में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। डेटा के मुताबिक, पैसिव इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी और इक्विटी मार्केट्स को लेकर निवेशकों का भरोसा काफी मजबूत हुआ है।

इक्विटी का दबदबा

इस ग्रोथ में इक्विटी-फोक्स्ड ETFs का सबसे बड़ा हाथ रहा, जिन्होंने कुल नए इनफ्लो का $93.4 अरब हिस्सा हासिल किया। निवेशक विशेष रूप से टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर जैसे हाई-ग्रोथ सेक्टर वाली कंपनियों पर दांव लगा रहे हैं। इसके विपरीत, फिक्स्ड-इनकम या बॉन्ड-आधारित ETFs में निवेशकों ने बहुत कम रुचि दिखाई और वहां केवल $0.7 अरब का ही निवेश आया।

कहाँ बढ़ा पैसा, कहाँ से निकला?

क्षेत्रीय स्तर पर देखें तो साउथ कोरिया और ताइवान इस कैपिटल शिफ्ट के सबसे बड़े लाभार्थी बनकर उभरे हैं। इसका मुख्य कारण इन देशों का सेमीकंडक्टर और टेक हार्डवेयर सप्लाई चेन में मजबूत आधार होना है। दूसरी तरफ, जापान-आधारित ETFs में निवेशकों ने निराशा जताई है, जहाँ $1.3 अरब की निकासी (Outflow) दर्ज की गई। यह संकेत है कि निवेशक अब जापान के बजाय अन्य बाजारों में बेहतर ग्रोथ की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

रिस्क फैक्टर

बाजार के जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में एक ही सेक्टर (टेक और AI) में पैसा लगने से जोखिम भी बढ़ा है। यदि इन उद्योगों में कोई गिरावट आती है, तो इसका सीधा असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर पड़ सकता है। इसके अलावा, जियो-पॉलिटिकल तनाव और ग्लोबल ट्रेड की अनिश्चितताएं भी कैपिटल फ्लो की दिशा कभी भी बदल सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.