भारत का Specialised Investment Fund (SIF) सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है और इसका AUM **₹31,175 करोड़** तक पहुंच गया है। साल 2026 में इसमें **528%** की जबरदस्त ग्रोथ देखी गई है, लेकिन मार्केट में कंसंट्रेशन का रिस्क भी बना हुआ है।
स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (SIF) मार्केट भारत में काफी तेजी से अपने पैर पसार रहा है। अगस्त 2026 तक इसका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹31,175 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुका है। यह पिछले एक साल में 528% की उछाल को दर्शाता है, जो यह बताता है कि निवेशक अब पारंपरिक म्यूचुअल फंड से आगे बढ़कर जटिल और सोफिस्टिकेटेड प्रोडक्ट्स में रुचि ले रहे हैं। इन फंड्स में एंट्री के लिए कम से कम ₹10 लाख का निवेश जरूरी होता है।
मार्केट में किनका है कब्जा?
इस सेक्टर में विस्तार तो दिख रहा है, लेकिन इसका बड़ा हिस्सा केवल तीन फंड हाउस के पास है। डेटा के मुताबिक, Edelweiss Mutual Fund का Altiva, ICICI Prudential का iSIF और SBI Mutual Fund का Magnum मिलकर इंडस्ट्री के कुल एसेट का 70% हिस्सा कंट्रोल करते हैं। अकेले Edelweiss Altiva के पास ₹10,785 करोड़ का एसेट है, जबकि ICICI Prudential iSIF के पास ₹5,430 करोड़ और SBI Magnum के पास ₹5,119 करोड़ हैं।
ग्रोथ की मुख्य वजह 'हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट' रणनीतियां हैं, जो कुल इनफ्लो का करीब 69% हिस्सा बनाती हैं। ये फंड मैनेजर्स को सामान्य स्कीमों के मुकाबले ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देती हैं।
रिस्क और निवेशकों के लिए नसीहत
एक्सपर्ट्स निवेशकों को सावधान रहने की सलाह दे रहे हैं। यह कैटेगरी अभी नई है (साल 2025 में लॉन्च हुई) और इसने अभी तक मार्केट का पूरा साइकिल (तेजी और मंदी दोनों) नहीं देखा है। चूँकि ये हाइब्रिड अप्रोच अपनाते हैं, इसलिए इनमें रिस्क और लिक्विडिटी का स्तर पारंपरिक फंड्स से अलग हो सकता है। सिर्फ एसेट साइज देखकर निवेश करना रिस्की हो सकता है, क्योंकि भीड़ एक ही तरह की रणनीति अपनाकर पोर्टफोलियो ओवरक्राउडिंग का खतरा पैदा कर सकती है।
