SIP के जरिए निवेश का सिलसिला लगातार मजबूत बना हुआ है, और मार्च 2026 में तो यह रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया, जहाँ ₹32,087 करोड़ का भारी निवेश आया। यह दिखाता है कि निवेशक अपना भरोसा बनाए हुए हैं। इसके साथ ही, निवेशक भी पहले से ज्यादा समझदार हो रहे हैं, और फरवरी 2026 तक हर SIP अकाउंट में औसतन ₹1.59 लाख जमा हो चुके थे, जो FY21 में ₹1.15 लाख थे।
नए निवेशकों की एंट्री पर ब्रेक?
लेकिन, इस मजबूत फ्लो के बावजूद, एक चिंताजनक ट्रेंड भी छिपा है: नए SIP अकाउंट्स की रफ्तार पिछले दो साल से धीमी पड़ गई है। FY26 में कुल SIP कंट्रीब्यूशन 21% बढ़कर ₹3,49,589 करोड़ हो गया, लेकिन नए SIP अकाउंट्स की संख्या FY24 के 2.037 करोड़ से घटकर FY25 में 1.657 करोड़ और FY26 में फरवरी तक सिर्फ 0.927 करोड़ रह गई।
डायरेक्ट चैनल में भारी गिरावट
इसकी सबसे बड़ी वजह डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट चैनल्स में आई भारी गिरावट है। ये चैनल, जहाँ से पहले लाखों नए अकाउंट्स खुलते थे, अब सिकुड़ गए हैं। FY24 में जहाँ 1.06 करोड़ SIPs खुले थे, वहीं FY25 में यह आंकड़ा घटकर 71 लाख रह गया। FY26 में तो फरवरी तक यह सिर्फ 9.27 लाख ही रहा। इसका एक बड़ा कारण यह भी रहा कि अप्रैल 2025 में करीब 42.8 लाख डायरेक्ट SIP अकाउंट्स मैच्योर या क्लोज हो गए।
मार्केट की उथल-पुथल और बढ़ता खर्च
FY26 में मार्केट की अस्थिरता, ग्लोबल टेंशन और FIIs (Foreign Institutional Investors) के आउटफ्लो जैसे कारणों ने एसेट ग्रोथ पर दबाव बनाया। Nifty 50 जैसे प्रमुख इंडेक्स में साल भर में करीब 5.05% की गिरावट दर्ज की गई। साथ ही, नए क्लाइंट्स को जोड़ने के लिए डिस्ट्रीब्यूटर्स का खर्च भी बढ़ा है, जिससे इंटरमीडियरी चैनल्स से नया पैसा जुटाना मुश्किल हो गया है।
SIP की मजबूती और निवेशक परिपक्वता
इन मुश्किलों के बावजूद, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने मजबूती दिखाई है, और FY26 के अंत तक AUM (Assets Under Management) 12.2% बढ़कर ₹73.73 लाख करोड़ हो गया। LIC Mutual Fund के MD और CEO, रवि कुमार झा का कहना है कि यह निवेशक परिपक्वता का संकेत है और भविष्य में इंडस्ट्री की ग्रोथ एक समर्पित निवेशक बेस से ही होगी।
भविष्य की चिंताएँ: डायरेक्ट चैनल पर निर्भरता और मार्केट रिस्क
डायरेक्ट SIP अकाउंट्स की संख्या में यह बड़ी गिरावट भविष्य की ग्रोथ के लिए एक बड़ी कमजोरी है। अगर इंडस्ट्री नए निवेशकों को, खासकर डिजिटल डायरेक्ट चैनल्स से, आकर्षित करने में संघर्ष करती है, तो ग्रोथ सीमित हो सकती है। छोटे-कैप स्टॉक्स के हाई P/E रेश्यो (जनवरी 2026 में 32.4) भी ओवरवैल्यूएशन और शार्प करेक्शन का संकेत दे रहे हैं, जो नए निवेशकों को डरा सकते हैं।
