हाइब्रिड फंड्स में क्यों लगी है दौड़?
भारत में स्पेशल इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) ने ₹12,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। यह दिखाता है कि समझदार निवेशक अब पारंपरिक म्यूचुअल फंड से हटकर नई और खास स्ट्रेटेजी वाले फंड्स की ओर रुख कर रहे हैं। अक्टूबर 2025 में ₹2,010 करोड़ की संपत्ति से शुरू होकर, यह आंकड़ा अप्रैल 2026 तक बढ़कर ₹12,329 करोड़ तक पहुंच गया है।
इस ग्रोथ में हाइब्रिड स्ट्रेटेजी का दबदबा साफ दिखता है, जिसके पास ₹9,155 करोड़ यानी कुल SIFs असेट्स का 74% हिस्सा है। इनमें भी 'हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट फंड्स' अकेले ₹8,933 करोड़ (कुल का 72%) संभाल रहे हैं। इससे साफ है कि निवेशकों का इन खास स्ट्रेटेजी पर भरोसा काफी मजबूत है।
अमीरों की पहली पसंद SIFs
SIFs में 50,000 से ज़्यादा इन्वेस्टर अकाउंट (फोलियो) खुल चुके हैं, जिनका औसत निवेश साइज लगभग ₹24.6 लाख है। वहीं, 'एसेट एलोकेटर लॉन्ग-शॉर्ट' फंड्स के लिए यह औसत ₹47.5 लाख तक जाता है। इससे पता चलता है कि SIFs मुख्य रूप से हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को आकर्षित कर रहे हैं। ये निवेशक अक्सर ज्यादा फीस वाले स्पेशलाइज्ड फंड्स में निवेश करना पसंद करते हैं।)
डेट स्ट्रेटेजी से निवेशकों ने बनाई दूरी
खास बात यह है कि SIFs के तहत 'डेट-ऑरिएंटेड लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रेटेजी' में निवेशकों की बिल्कुल भी दिलचस्पी नहीं दिख रही है। इस कैटेगरी में अब तक एक भी फंड या पैसा नहीं लगा है। यह बिल्कुल वैसा ही है, जैसे डेट म्यूचुअल फंड्स ने अप्रैल 2026 में ₹2.47 लाख करोड़ जुटाए थे। डेट SIFs में दिलचस्पी की कमी या तो नए प्रोडक्ट आइडियाज की कमी को दर्शाती है, या फिर यह कि निवेशक इस स्ट्रक्चर में इक्विटी स्ट्रेटेजी से मिलने वाले संभावित बड़े रिटर्न को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं।
AIFs से अलग, SIFs की अपनी पहचान
भारत के अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट मार्केट के विस्तार के बीच SIFs तेजी से बढ़ रहे हैं। SEBI द्वारा 2012 से रेगुलेट किए जा रहे अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के पास मार्च 2024 तक करीब ₹11.35 लाख करोड़ की कुल कमिटमेंट्स थीं। AIFs, प्राइवेट इक्विटी और रियल एस्टेट जैसे क्षेत्रों में ₹1 करोड़ के मिनिमम निवेश के साथ आते हैं। वहीं, SIFs, ₹10 लाख के मिनिमम निवेश के साथ स्ट्रेटेजी-आधारित निवेश पर फोकस करते हैं।
इकोनॉमी और SEBI के नियम
SIFs ऐसे समय में लॉन्च हो रहे हैं जब इकोनॉमी स्थिर लेकिन सतर्क बनी हुई है। अप्रैल 2026 में महंगाई दर 3.48% थी, जो RBI के 4% के लक्ष्य से नीचे है। RBI ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा है। SEBI के फरवरी 2025 के फ्रेमवर्क ने SIFs के लिए साफ नियम बनाए हैं, जिनका मकसद इनोवेशन और निवेशकों की सुरक्षा है।
खतरे और चिंताएं
'हाइब्रिड लॉन्ग-शॉर्ट स्ट्रेटेजी' में भारी कंसंट्रेशन एक बड़ा रिस्क है। बाजार की चाल बदलने या इन स्ट्रेटेजी में कोई गलती होने पर SIFs को बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। अमीर निवेशकों पर निर्भरता भी एक रिस्क है, क्योंकि इस वर्ग में मंदी आने पर SIFs पर बुरा असर पड़ सकता है। डेट ऑप्शन्स की कमी यह भी बताती है कि SIFs शायद सभी तरह के एडवांस्ड इन्वेस्टमेंट सॉल्यूशंस ऑफर न करें।
