SEBI का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन: क्या Passive Funds के लिए बढ़ेगी मुश्किल?

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
SEBI का नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन: क्या Passive Funds के लिए बढ़ेगी मुश्किल?

SEBI ने 3 अगस्त, 2026 से F&O शेयरों के लिए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' लागू कर दिया है। यह कदम मार्केट में प्राइस डिस्कवरी को बेहतर बनाएगा, लेकिन निवेशकों को शुरुआती उतार-चढ़ाव और ETF की कीमतों में अंतर के लिए तैयार रहना होगा।

बाजार का नया नियम क्या है?

भारतीय शेयर बाजार में मार्केट क्लोज होने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। SEBI ने पुराने VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) तरीके को हटाकर अब 20 मिनट की एक ऑक्शन विंडो (दोपहर 3:15 से 3:35 बजे तक) शुरू की है। इसका मकसद क्लोजिंग प्राइस को केवल औसत ट्रेड के बजाय असली मार्केट डिमांड के आधार पर तय करना है।

Passive Investing पर क्या असर होगा?

ETF और इंडेक्स फंड्स पूरी तरह से क्लोजिंग प्राइस पर निर्भर होते हैं। सटीक क्लोजिंग प्राइस मिलने से इनका 'ट्रैकिंग एरर' कम होगा। DSP Mutual Fund के अनिल घेलानी का मानना है कि अगले 5 सालों में पैसिव एसेट्स का हिस्सा कुल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का 30% तक पहुंच सकता है, जो अभी 17% से 18% के आसपास है।

निवेशकों के लिए चुनौतियां और रिस्क

  • प्राइस मिसमैच: कई ETFs ऐसे स्टॉक्स में निवेश करते हैं जिनमें से कुछ F&O सेगमेंट में हैं (नई विंडो में) और कुछ नहीं (पुरानी विधि पर)। इससे कैलकुलेशन में कंफ्यूजन पैदा हो सकता है।
  • वोलेटिलिटी: शुरुआती दौर में मार्केट में लिक्विडिटी की समस्या और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, क्योंकि ट्रेडर्स अभी इस नई प्रक्रिया के हिसाब से अपनी रणनीति बदल रहे हैं।

SEBI का यह कदम भले ही ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के करीब है, लेकिन फंड हाउस के लिए अपने ट्रैकिंग एरर को मैनेज करना आने वाले समय में एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.