NFO की रफ्तार थमी, SIFs में दौड़
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। साल 2026 के जनवरी से अप्रैल के दौरान, पिछले साल की तुलना में New Fund Offers (NFOs) की संख्या में कमी आई है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में 69 NFOs लॉन्च हुए, जबकि 2025 में इसी दौरान 77 फंड्स लॉन्च किए गए थे। सिर्फ लॉन्चिंग ही नहीं, इन NFOs के जरिए फंड जुटाने में भी गिरावट देखी गई है। जहाँ 2025 की शुरुआत में NFOs ने करीब ₹13,000 करोड़ जुटाए थे, वहीं 2026 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा घटकर लगभग ₹10,650 करोड़ रह गया। फंड मैनेजरों का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है, जहाँ वे प्रोडक्ट गैप्स और निवेशकों की जरूरत पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं, न कि सिर्फ मार्केट की टाइमिंग पर।
स्पेशलाइज्ड फंड्स की चमक
इसके बिलकुल उलट, Specialized Investment Funds (SIFs) तेजी से उभर रहे हैं। मार्च 2026 तक, इन स्पेशलाइज्ड फंड्स के AUM (Assets Under Management) ₹10,000 करोड़ के पार पहुँच गए थे, जो 14 अलग-अलग पेशकशों में फैले हुए हैं। जनवरी 2026 तक SIFs का AUM ₹6,501 करोड़ था, जो अक्टूबर 2025 से लगभग तीन गुना हो गया था। फरवरी 2026 तक यह आंकड़ा ₹9,711 करोड़ से अधिक हो गया था। ये फंड्स पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स और अधिक एक्सक्लूसिव Portfolio Management Services (PMS) के बीच की खाई को पाट रहे हैं। ₹10 लाख के न्यूनतम निवेश के साथ, ये फंड्स निवेशकों को ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देते हैं। इक्विटी, डेट और डेरिवेटिव्स को मिलाकर बनी हाइब्रिड SIF स्ट्रेटेजीज़ इस ट्रेंड को लीड कर रही हैं।
इंडस्ट्री का ओवरव्यू और भविष्य
कुल मिलाकर, भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने फाइनेंशियल ईयर 2026 में 12.2% की ग्रोथ के साथ ₹73.73 लाख करोड़ के AUM का आंकड़ा पार किया। Systematic Investment Plans (SIPs) से लगातार हो रही रिटेल भागीदारी, जो मार्च 2026 में रिकॉर्ड ₹32,087 करोड़ तक पहुँच गई थी, इस ग्रोथ का एक बड़ा सहारा बनी हुई है। हालांकि, NFOs में आई सुस्ती यह बताती है कि निवेशक शायद सामान्य प्रोडक्ट्स से ऊब गए हैं या मौजूदा बाजार में ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं। अप्रैल की शुरुआत में निफ्टी और सेंसेक्स में 2% से ज्यादा की तेजी ने बाजार में कुछ उम्मीद जगाई है, लेकिन इसका असर अभी NFOs पर नहीं दिख रहा।
स्पेशलाइज्ड फंड्स के जोखिम
हालांकि, इन स्पेशलाइज्ड फंड्स का प्रदर्शन ट्रैक रिकॉर्ड अभी नया है। मार्च 2026 के अंत तक, इक्विटी-ओरिएंटेड SIF स्ट्रेटेजीज़ अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रही थीं। कई SIFs को लॉन्च के बाद से नुकसान हुआ है, खासकर जब मिड- और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में बड़ी गिरावट आई थी। ऐसे में, यह देखना जल्दबाजी होगी कि ये फंड्स लंबे समय में कैसा प्रदर्शन करेंगे। वहीं, SIFs की बढ़ती संख्या को लेकर चिंताएं भी हैं कि कहीं फंड हाउसेज सिर्फ एसेट जुटाने और फीस कमाने पर ध्यान न दें, जैसा कि कभी-कभी NFOs के साथ भी देखा गया है। रेगुलेटरी फ्रेमवर्क को इन नए फंड्स पर कड़ी नजर रखनी होगी।
आगे क्या?
इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, 2026 में म्यूचुअल फंड सेक्टर में ग्रोथ जारी रहने की उम्मीद है, और AUM 2031 तक $1.27 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है। NFOs की गति मापी हुई रह सकती है, लेकिन SIFs का सेगमेंट और बढ़ने की संभावना है।
