Mutual Fund AUM ₹85 लाख करोड़ पार: भारतीय बाज़ार में निवेश का बड़ा रिकॉर्ड

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Mutual Fund AUM ₹85 लाख करोड़ पार: भारतीय बाज़ार में निवेश का बड़ा रिकॉर्ड

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। जुलाई 2026 तक, इंडस्ट्री की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर **₹85.76 लाख करोड़** हो गई है। यह इंडस्ट्री **17.1%** की CAGR दर से बढ़ रही है, जो ग्लोबल एवरेज **6.9%** से काफी ज़्यादा है। AUM-to-GDP रेशियो **21%** है, जो बताता है कि अभी और विस्तार की काफी गुंजाइश है। हालांकि, बाज़ार की बढ़ती अस्थिरता के चलते ज़्यादातर स्कीमें उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं, जो एक बड़ा जोखिम है।

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में तूफानी तेज़ी

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने एसेट्स के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। जुलाई 2026 तक, इंडस्ट्री की कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹85.76 लाख करोड़ के पार पहुंच गई है। यह भारतीय परिवारों की बचत को कैपिटल मार्केट्स की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है। 2020 से 2025 के बीच, इस इंडस्ट्री ने 17.1% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है, जो दुनिया भर की 6.9% की औसत ग्रोथ रेट से कहीं ज़्यादा है।

विकास की गुंजाइश और भविष्य की राह

इस ज़बरदस्त ग्रोथ के बावजूद, भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री अभी भी ग्लोबल स्टैंडर्ड्स की तुलना में शुरुआती दौर में है। मार्च 2026 तक, इंडस्ट्री का AUM-to-GDP रेशियो करीब 21% था। यह पिछले कुछ सालों से काफी ज़्यादा है, लेकिन फिर भी दुनिया भर के औसत 64% से काफी कम है। लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए, यह अंतर एक बड़ा संकेत है कि जैसे-जैसे वित्तीय जागरूकता बढ़ेगी और लोग फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे पारंपरिक सेविंग प्रोडक्ट्स से दूर जाएंगे, इंडस्ट्री में विस्तार की काफी संभावनाएं हैं।

रिटेल निवेशकों की भागीदारी ही है ग्रोथ का इंजन

इस विस्तार का एक बड़ा श्रेय रिटेल निवेशकों को जाता है। मार्च 2026 तक यूनिक म्यूचुअल फंड निवेशकों की संख्या लगभग 6.14 करोड़ थी, और जुलाई 2026 तक कुल फोलियो की संख्या 28 करोड़ से ज़्यादा हो गई। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) इस भागीदारी का सबसे बड़ा जरिया बन गए हैं। SIPs के ज़रिए हर महीने ₹32,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश आ रहा है, जो मार्केट्स में लगातार और स्थिर पूंजी का प्रवाह सुनिश्चित करता है। यह तरीका निवेशकों को लंबी अवधि में मार्केट की अस्थिरता के प्रभाव को मैनेज करने में मदद करता है।

जोखिम और प्रदर्शन पर दबाव

जहां ऊपरी आंकड़े मज़बूत दिख रहे हैं, वहीं निवेशकों को सेक्टर के सामने मौजूद चुनौतियों के बारे में भी पता होना चाहिए। बाज़ार की बढ़ती अस्थिरता का पोर्टफोलियो के प्रदर्शन पर सीधा असर पड़ा है। फाइनेंशियल ईयर 2026 में, नेगेटिव एनुअल रिटर्न देने वाली म्यूचुअल फंड स्कीम्स की संख्या बढ़कर 731 हो गई, जो फाइनेंशियल ईयर 2025 में 243 थी। यह दिखाता है कि इंडस्ट्री की ओवरऑल ग्रोथ के बावजूद, मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौरान अलग-अलग स्कीम्स का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रह सकता है।

इसके अलावा, एसेट मैनेजमेंट कंपनियां (AMCs) खुद दबाव झेल रही हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण कंपनियों को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश करना पड़ रहा है, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव बन रहा है। निवेशकों को ग्लोबल मार्केट के सेंटिमेंट पर भी नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि जब ग्लोबल जोखिम बढ़ते हैं तो इंस्टीट्यूशनल कैपिटल कभी-कभी भारत से बाहर जाता हुआ दिखा है। रिटेल निवेशकों के लिए, अपनी रिस्क क्षमता के अनुसार स्कीम्स चुनना और SIPs के ज़रिए लॉन्ग-टर्म निवेश बनाए रखना महत्वपूर्ण है, साथ ही चुनी गई फंड्स के प्रदर्शन पर भी लगातार नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.