म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री रिकॉर्ड पर! AUM ₹85.76 लाख करोड़ पार, SIP इनफ्लो भी टॉप पर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री रिकॉर्ड पर! AUM ₹85.76 लाख करोड़ पार, SIP इनफ्लो भी टॉप पर

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने जुलाई 2026 तक ₹85.76 लाख करोड़ की संपत्ति के साथ एक नया रिकॉर्ड बनाया है। यह शानदार ग्रोथ 6.14 करोड़ यूनिक निवेशकों के बूते पर हुई है। जहां SIP और पैसिव फंड्स ज़बरदस्त बढ़त दिखा रहे हैं, वहीं निवेशक बढ़ती अकाउंट क्लोजर और मार्केट की अस्थिरता पर भी नज़र बनाए हुए हैं।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का नया माइलस्टोन!

साल 2026 में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जुलाई तक, कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) रिकॉर्ड ₹85.76 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह ग्रोथ मार्च 2026 तक 6.14 करोड़ यूनिक निवेशकों के आधार तक पहुंचने से और मजबूत हुई है। यह आंकड़े इस बात का संकेत देते हैं कि भारतीय घरों में पैसे बचाने और निवेश करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव आया है।

SIP बनी ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) इस ग्रोथ का मुख्य जरिया बनकर उभरे हैं। जुलाई 2026 तक, मासिक SIP इनफ्लो लगातार ₹30,000 करोड़ से ऊपर बना रहा, जो इसी महीने ₹31,961 करोड़ तक पहुंच गया। एक्टिव SIP खातों की संख्या में भी ज़बरदस्त इजाफा हुआ है, जो 10.63 करोड़ को पार कर गई है। घरेलू निवेशकों से लगातार आ रहा यह पैसा भारतीय शेयर बाजार को एक मजबूत सहारा दे रहा है, जो अक्सर ग्लोबल अस्थिरता के दौरान विदेशी निवेशकों की बिकवाली के असर को सोख लेता है।

पैसिव फंड्स का बढ़ता दबदबा

इंडस्ट्री में एक और बड़ा ट्रेंड देखने को मिला है, वो है पैसिव फंड्स का तेज़ी से बढ़ना। इनमें इंडेक्स फंड्स और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) शामिल हैं। ये फंड्स आमतौर पर किसी मार्केट इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, न कि उससे बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं। अब ये कुल इंडस्ट्री AUM का लगभग 18% हिस्सा रखते हैं। इनकी ग्रोथ कम लागत और धन सृजन के सरल तरीके की तलाश में लगे निवेशकों से प्रेरित है। इस बदलाव ने कॉम्पिटिशन का माहौल बदला है, जहां एसेट मैनेजमेंट कंपनियां इस मांग को पूरा करने के लिए अपने पैसिव फंड्स के विस्तार पर ज़ोर दे रही हैं।

छोटे शहरों और महिला निवेशकों की भागीदारी

छोटे शहरों से निवेशकों की भागीदारी और म्यूचुअल फंड निवेश में महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी ने भी इंडस्ट्री को स्थिर करने में मदद की है। बड़े शहरों से आगे बढ़कर, म्यूचुअल फंड अब एक व्यापक जनसांख्यिकी तक पहुंच रहे हैं। यह विविधीकरण महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इंडस्ट्री की निर्भरता को कुछ हाई-नेट-वर्थ निवेशकों के छोटे समूह से कम करता है।

निवेशकों के लिए जोखिम और आगे की राह

हालांकि, कुछ ऐसे जोखिम और ट्रेंड्स भी हैं जिन पर निवेशकों को बारीकी से नज़र रखनी चाहिए। इनमें से एक महत्वपूर्ण कारक 'SIP स्टॉपेज रेशियो' है। 2026 की शुरुआत में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रोके गए या मैच्योर हुए SIP खातों की संख्या कभी-कभी नए रजिस्ट्रेशन के बराबर या उससे ज़्यादा देखी गई। यह दर्शाता है कि जहां सिस्टम में नया पैसा आ रहा है, वहीं मौजूदा SIP की स्थिरता चर्चा का एक अहम बिंदु बन गई है। हाई मार्केट वोलेटिलिटी रिटेल निवेशकों के धैर्य की परीक्षा ले सकती है, और किसी भी लंबे समय तक चलने वाली मार्केट करेक्शन से भविष्य के इनफ्लो पर असर पड़ सकता है।

इंडस्ट्री का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि मुश्किल बाजार के दौर में यह घरेलू रिटेल भागीदारी कितनी मजबूत बनी रहती है। निवेशक और मार्केट के जानकार मार्केट की सेहत के प्राथमिक संकेतक के तौर पर मासिक इनफ्लो नंबर्स और SIP अकाउंट डेटा पर नज़र रखे हुए हैं। इनफ्लो के इन ऊंचे स्तरों को बनाए रखने की इंडस्ट्री की क्षमता व्यापक भारतीय इक्विटी मार्केट की स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.