म्यूचुअल फंड: इक्विटी एसेट्स ने रचा इतिहास! जुलाई में ₹48.5 लाख करोड़ का रिकॉर्ड पार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
म्यूचुअल फंड: इक्विटी एसेट्स ने रचा इतिहास! जुलाई में ₹48.5 लाख करोड़ का रिकॉर्ड पार

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए जुलाई 2026 एक ऐतिहासिक महीना रहा। इक्विटी म्यूचुअल फंड्स के कुल एसेट्स ₹48.5 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। इसका मुख्य कारण ₹31,961 करोड़ का लगातार SIP निवेश रहा, लेकिन मुनाफावसूली (Redemption) बढ़ने से नेट इनफ्लो में मामूली कमी आई।

इंडस्ट्री ने बनाया नया कीर्तिमान

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने जुलाई 2026 में एक अहम पड़ाव पार किया है। इंडस्ट्री के कुल मैनेजमैंट के तहत एसेट्स (AUM) बढ़कर ₹85.76 लाख करोड़ हो गए हैं। इसमें से, इक्विटी-ओरिएंटेड म्यूचुअल फंड्स के एसेट्स ने ₹48.5 लाख करोड़ का नया रिकॉर्ड बनाया, जो इंडस्ट्री के कुल औसत एसेट्स का 56% है।

SIP का जलवा बरकरार

इस ग्रोथ का सबसे बड़ा सहारा बने निवेशक, खासकर सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए। जुलाई में, मासिक SIP कंट्रीब्यूशन ₹31,961 करोड़ रहा। यह लगातार पांचवां महीना है जब SIP कंट्रीब्यूशन ₹30,000 करोड़ के पार रहा है। इससे पता चलता है कि बड़े मार्केट वोलेटिलिटी के बावजूद, लंबे समय के रिटेल निवेशक लगातार हर महीने निवेश कर रहे हैं।

मुनाफे की बुकिंग और नेट इनफ्लो पर असर

हालांकि, कुल निवेश काफी मजबूत रहा, लेकिन इक्विटी स्कीम्स में नेट इनफ्लो (Net Inflow) में थोड़ी नरमी दिखी। जुलाई में इक्विटी फंड्स में नेट इनफ्लो ₹24,697 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले महीने की तुलना में करीब 15% कम है। इसकी मुख्य वजह रही कि शेयर बाजार में तेजी आने पर कई निवेशकों ने मुनाफावसूली (Redemption) की या अपने पोर्टफोलियो को री-बैलेंस किया।

पसंदीदा फंड कैटेगरी

निवेशकों की पहली पसंद फ्लेक्सी-कैप फंड्स बने हुए हैं, जिनका इक्विटी एसेट्स में 15.6% का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके बाद 14.6% के साथ थीमैटिक फंड्स, 13.6% के साथ मिड-कैप फंड्स और 11.5% के साथ स्मॉल-कैप फंड्स आते हैं। ये कैटेगरी मिलकर कुल इक्विटी एसेट्स का आधे से ज्यादा हिस्सा कवर करती हैं, जो म्यूचुअल फंड पार्टिसिपेंट्स के बीच डायवर्सिफाइड अप्रोच को दिखाता है।

पैसिव फंड्स में भी बढ़ी रफ्तार

पैसिव फंड्स, जो मैनेजरों द्वारा एक्टिव स्टॉक चुनने के बजाय मार्केट इंडेक्स को ट्रैक करते हैं, ने भी जोरदार ग्रोथ दिखाई है। पैसिव फंड्स में एसेट्स बढ़कर ₹15.5 लाख करोड़ हो गए, जो पिछले साल के मुकाबले 23.3% ज्यादा है। इनमें इक्विटी पैसिव फंड्स की बड़ी हिस्सेदारी है, जो कुल पैसिव एसेट्स का लगभग 68% है।

आगे क्या?

अब यह देखना अहम होगा कि आने वाले महीनों में मुनाफावसूली का यह ट्रेंड जारी रहता है या नहीं। जहां SIP कंट्रीब्यूशन एक स्थिर आधार प्रदान करता है, वहीं मार्केट की उथल-पुथल अक्सर निवेशकों को अपने निवेश को एडजस्ट करने या बाहर निकलने के लिए प्रेरित करती है। इक्विटी एसेट्स का प्रदर्शन शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगा। साथ ही, पोर्टफोलियो में होने वाले बदलाव और नई स्कीम कैटेगरी जैसे रेगुलेटरी बदलाव भी मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए ध्यान देने योग्य होंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.