डिविडेंड यील्ड फंड्स क्यों कर रहे हैं कमाल?
दरअसल, डिविडेंड यील्ड फंड्स की इस कामयाबी के पीछे मुख्य वजह है उनका छोटा 'एसेट्स अंडर मैनेजमेंट' (AUM)। यह छोटा AUM फंड मैनेजर्स को बाज़ार की चाल के साथ तेज़ी से एडजस्ट करने की फ्लेक्सिबिलिटी देता है। बड़े फ्लैक्सी-कैप फंड्स के मुकाबले, जो अक्सर बड़े स्टॉक्स में ज़्यादा पैसा लगाते हैं, डिविडेंड यील्ड फंड्स मिड-कैप और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में भी आसानी से निवेश कर सकते हैं। हाल के बाज़ार में तेज़ी के दौरान, खासकर 2021 और 2023 में, इस फ्लेक्सिबिलिटी का भरपूर फायदा उठाया गया। जहाँ फ्लैक्सी-कैप फंड्स ने 2023 में औसतन 67% लार्ज-कैप में रखे, वहीं डिविडेंड यील्ड फंड्स ने अपना लार्ज-कैप एक्सपोज़र 54% से 67% के बीच रखा और ज़रूरत के हिसाब से मिड और स्मॉल-कैप में 15% तक निवेश बढ़ाया।
डिविडेंड देने वाली कंपनियों पर फोकस
ये फंड्स मुख्य तौर पर उन कंपनियों में पैसा लगाते हैं जो लगातार डिविडेंड (Dividend) देती हैं। ऐसे फंड्स के नियम के अनुसार, कम से कम 65% पैसा इक्विटी में लगाना होता है, जिसमें डिविडेंड देने वाले स्टॉक्स को प्राथमिकता दी जाती है। इन कंपनियों के पास अक्सर मजबूत कैश फ्लो (Cash Flow) होता है, वे कैपिटल को लेकर समझदारी से फैसले लेती हैं और शेयरहोल्डर्स पर ध्यान देती हैं। एनालिसिस बताता है कि ऐसे फंड्स में शामिल कंपनियों का कैश फ्लो मार्जिन बेहतर होता है और डेट (Debt) भी बाज़ार की औसत कंपनियों के मुकाबले कम होता है। ये खूबियां ऐसे माहौल में और भी अहम हो जाती हैं जहाँ महंगाई और बढ़ते इंटरेस्ट रेट्स (Interest Rates) की आशंका बनी रहती है।
हालिया प्रदर्शन और रिस्क प्रोफाइल
हाल के प्रदर्शन को देखें तो डिविडेंड यील्ड फंड्स और भी बेहतर दिखते हैं। पिछले एक साल में, इस कैटेगरी का औसत रिटर्न 18.5% रहा, जो फ्लैक्सी-कैप कैटेगरी के 15.2% से ज़्यादा है। साल की शुरुआत से अब तक (Year-to-Date) भी ये फंड 6.1% ऊपर हैं, जबकि फ्लैक्सी-कैप 4.9% बढ़े हैं। रिटर्न के अलावा, ये फंड्स बेहतर रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न्स (Risk-Adjusted Returns) भी देते हैं। इनमें वोलैटिलिटी (Volatility) कम देखने को मिलती है, जिसे स्टैंडर्ड डेविएशन (Standard Deviation) से मापा जाता है, और ये छोटे बाज़ार करेक्शन के दौरान दूसरे स्टॉक फंड्स के मुकाबले बेहतर साबित हुए हैं। हालांकि, इनका औसत एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) थोड़ा ज़्यादा है (लगभग 1.8% बनाम फ्लैक्सी-कैप का 1.6%), लेकिन यह ज़्यादा स्थिर ग्रोथ की उम्मीद दे सकता है।
संभावित जोखिम
इनकी हालिया कामयाबी के बावजूद, निवेशकों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। डिविडेंड देने वाले स्टॉक्स का प्रदर्शन साइक्लिकल (Cyclical) हो सकता है। इंटरेस्ट रेट्स में अचानक बड़ी बढ़ोतरी इनकी वैल्यू को प्रभावित कर सकती है, क्योंकि ज़्यादा इंटरेस्ट रेट्स भविष्य के डिविडेंड्स को कम आकर्षक बना देते हैं और फिक्स्ड इनकम ऑप्शन्स को ज़्यादा लुभावना बनाते हैं। इसके अलावा, अगर कंपनियों की कमाई में बड़ी गिरावट आती है, तो डिविडेंड देने की उनकी क्षमता पर असर पड़ सकता है। कुछ बड़े डिविडेंड यील्ड फंड्स के AUM में काफी बढ़ोतरी हुई है, जिससे उनमें भी वही फ्लो इशूज़ आ सकते हैं जो बड़े फ्लैक्सी-कैप फंड्स में देखे गए हैं, हालांकि अभी यह छोटे स्तर पर है। साथ ही, भले ही ये कंपनियां स्थिर हों, पर उनकी ग्रोथ स्पीड उन कंपनियों से कम हो सकती है जो तेज़ी से विस्तार पर ध्यान देती हैं।