भारतीय महिला निवेशकों ने म्यूचुअल फंड में अपनी रणनीति बदली है। मार्च **2025** तक, महिलाओं ने अपने एसेट्स का **65%** हिस्सा इक्विटी में निवेश किया है, जो पांच साल पहले मात्र **40%** था। यह बदलाव विशेष रूप से छोटे शहरों (B30) में ज्यादा देखने को मिल रहा है।
पिछले पांच वर्षों में भारतीय महिला निवेशकों ने जोखिम लेने की क्षमता बढ़ाई है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2020 के मुकाबले 25% का उछाल यह दर्शाता है कि अब महिलाएं ट्रेडिशनल सेविंग्स से हटकर मार्केट-लिंक्ड ग्रोथ की तरफ देख रही हैं।
छोटे शहरों (B30) का दबदबा
निवेश के पैटर्न में बड़ा भौगोलिक अंतर सामने आया है। जुलाई 2026 के डेटा के अनुसार, टॉप 30 शहरों (T30) की तुलना में छोटे शहरों (B30) के निवेशक कहीं ज्यादा आक्रामक हैं। B30 क्षेत्रों में इक्विटी स्कीम्स का हिस्सा उनके कुल एसेट्स का 65.9% है, जबकि बड़े शहरों के निवेशक 39.8% निवेश ही इक्विटी में कर रहे हैं। इससे साफ है कि छोटे शहरों में ग्रोथ-ओरिएंटेड स्ट्रैटेजी को तेजी से अपनाया जा रहा है।
बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भरोसे की जीत
मार्केट में गिरावट के बावजूद निवेशकों का विश्वास डगमगाया नहीं है। फरवरी 2026 से मार्च 2026 के बीच इक्विटी फंड्स की एसेट वैल्यू ₹35.39 लाख करोड़ से घटकर ₹31.98 लाख करोड़ पर आ गई थी, लेकिन इसी दौरान फोलियो (खातों) की संख्या 18.12 करोड़ से बढ़कर 18.27 करोड़ हो गई।
पांच साल का रुझान देखें तो अगस्त 2021 में फोलियो की संख्या 7.3 करोड़ थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 18.9 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। अब बड़ी चुनौती यह है कि लंबे समय तक बाजार में दबाव रहने पर ये पोर्टफोलियो कैसे रिएक्ट करते हैं, क्योंकि अब व्यक्तिगत बचत का एक बड़ा हिस्सा सीधे मार्केट परफॉर्मेंस से जुड़ा हुआ है।
