बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय निवेशकों ने FY26 में SIP के जरिए रिकॉर्ड **₹2 लाख करोड़** का नेट निवेश किया है। हालांकि, नए SIP खातों को खोलने की रफ्तार पिछले साल के **1.7 करोड़** से घटकर **40 लाख** पर आ गई है।
निवेशकों की अनुशासन भरी रणनीति
आंकड़े बताते हैं कि भारतीय रिटेल निवेशक अब बाजार के उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं। FY26 में कुल ₹3.5 लाख करोड़ के ग्रॉस SIP निवेश में से नेट इनफ्लो 56% रहा, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 54% से कहीं बेहतर है। इसका मतलब यह है कि निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा पैसा निकालने के बजाय लंबे समय के लिए बने रहने को प्राथमिकता दे रहा है।
इसके अलावा, SIP से पैसा बाहर निकलने (आउटफ्लो) की रफ्तार भी कम हुई है। FY26 में ग्रॉस SIP आउटफ्लो में केवल 15% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो पिछले तीन सालों में सबसे धीमी ग्रोथ है। तुलना के लिए, FY24 में यह आंकड़ा 57% और FY25 में 18% था। स्पष्ट है कि निवेशक अब करेक्शन को बाजार से बाहर निकलने का नहीं, बल्कि निवेश जारी रखने का मौका मान रहे हैं।
नए अकाउंट्स की रफ्तार में सुस्ती
मौजूदा निवेशकों का भरोसा तो बरकरार है, लेकिन नए ग्राहकों को जोड़ने में थोड़ी सुस्ती देखी गई है। पिछले फाइनेंशियल ईयर के 1.7 करोड़ नए खातों के मुकाबले, FY26 में केवल 40 लाख नए SIP खाते खुले। इस गिरावट की मुख्य वजह बाजार की लगातार अस्थिरता रही है।
मार्केट इंडेक्स की बात करें, तो मार्च 2026 तक के दो वर्षों में Nifty 50 में 5% से ज्यादा की गिरावट आई। हालांकि, Nifty Midcap 150 इंडेक्स ने 6% की बढ़त दर्ज की, जबकि Nifty Smallcap 250 इंडेक्स लगभग फ्लैट रहा। बाजार में स्थिरता लौटते ही नए खातों के खुलने की रफ्तार पर फिर से नजर रहेगी, क्योंकि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की सेहत के लिए यह एक अहम स्तंभ है।
