Mutual Funds: रिटेल निवेशक कर रहे हैं डायरेक्ट प्लान्स का रुख, लागत बचाने की सबसे बड़ी वजह!

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Mutual Funds: रिटेल निवेशक कर रहे हैं डायरेक्ट प्लान्स का रुख, लागत बचाने की सबसे बड़ी वजह!

भारतीय रिटेल निवेशक अब म्यूचुअल फंड में सीधे निवेश करने का तरीका अपना रहे हैं। मार्च 2026 तक डायरेक्ट प्लान्स में उनका हिस्सा बढ़कर **36.7%** हो गया है। इस बदलाव की मुख्य वजह खर्चों में कटौती करना है, जबकि इंडस्ट्री का कुल AUM **₹73.73 लाख करोड़** को पार कर गया है।

क्यों डायरेक्ट प्लान्स को चुन रहे हैं निवेशक?

इस बड़े बदलाव के पीछे सबसे अहम कारण रेगुलर और डायरेक्ट प्लान्स के खर्च का अंतर है। रेगुलर म्यूचुअल फंड प्लान्स में डिस्ट्रिब्यूटर्स को कमीशन दिया जाता है, जो स्कीम के एक्सपेंस रेश्यो का हिस्सा होता है। डायरेक्ट प्लान्स में बिचौलियों को बाहर कर दिया जाता है, यानी कोई कमीशन नहीं लगता। नतीजतन, एक्सपेंस रेश्यो कम होता है और निवेशक को लंबे समय में ज्यादा नेट एसेट वैल्यू (NAV) का फायदा मिलता है। फाइनेंशियल लिटरेसी बढ़ने और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आसान इस्तेमाल के साथ, निवेशक अपनी दौलत बढ़ाने के लिए यह सस्ता रास्ता अपना रहे हैं।

इंडस्ट्री का पैमाना और ग्रोथ

यह ट्रेंड पूरे म्यूचुअल फंड सेक्टर में देखने को मिल रहा है। मार्च 2026 तक इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹73.73 लाख करोड़ तक पहुंच गया था। पूरे सेक्टर में, डायरेक्ट प्लान्स अब कुल एसेट्स का 45.1% हिस्सा रखते हैं। हालांकि रेगुलर प्लान्स में अभी भी ज्यादा एसेट्स हैं, लेकिन उनका हिस्सा धीरे-धीरे कम हो रहा है। हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) और नॉन-रेजिडेंट इंडियंस (NRIs) जैसे निवेशक भी खुद से निवेश करने की ओर बढ़ रहे हैं। उदाहरण के लिए, इसी पांच साल की अवधि में HNIs के बीच डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट का हिस्सा बढ़कर 35.1% हो गया था।

फाइनेंशियल डिसिप्लिन की जरूरत

जहां डायरेक्ट प्लान्स कम खर्च का फायदा देते हैं, वहीं इनमें कुछ जिम्मेदारियां भी आती हैं। रेगुलर प्लान्स के विपरीत, जिनमें सलाहकार या डिस्ट्रिब्यूटर गाइडेंस दे सकता है, डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट में निवेशक को खुद अपने पोर्टफोलियो के फैसले लेने होते हैं। निवेशकों को यह समझना होगा कि मार्केट की अस्थिरता इक्विटी-लिंक्ड निवेशों पर असर डाल सकती है, जैसा कि 2026 की शुरुआत में मार्केट करेक्शन के दौरान देखा गया। इसके अलावा, जहां सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) का मंथली इनफ्लो ₹31,000 करोड़ से ऊपर मजबूत बना हुआ है, वहीं मार्केट में तनाव के दौर में प्रोफेशनल गाइडेंस के बिना लॉन्ग-टर्म डिसिप्लिन बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है।

निवेशकों को क्या ट्रैक करना चाहिए?

जैसे-जैसे डिजिटल इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स विकसित हो रहे हैं, डायरेक्ट प्लान्स की बढ़ती लोकप्रियता जारी रहने की उम्मीद है। इस रास्ते को अपनाने वाले निवेशक यह ट्रैक कर सकते हैं कि फंड हाउस कंपीटिटिव मार्केट में अपने एक्सपेंस रेश्यो को कैसे एडजस्ट करते हैं और मैक्रोइकोनॉमिक बदलावों के बावजूद SIP इनफ्लो में ग्रोथ कितनी स्थिर रहती है। इंडस्ट्री में कुल फोलियो की संख्या 27.39 करोड़ तक पहुंच चुकी है, ऐसे में इंटरमीडियरी सपोर्ट के बिना नए निवेशकों की मार्केट की अस्थिरता को नेविगेट करने की क्षमता एक महत्वपूर्ण फैक्टर बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.