10-year सरकारी बॉन्ड यील्ड के **7.18%** तक पहुंचने के बाद फंड मैनेजरों का रुख बदल रहा है। इक्विटी मार्केट की ऊंचाइयों को देखते हुए अब फंड हाउस फिक्स्ड इनकम (Debt) की तरफ तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं।
बॉन्ड यील्ड में उछाल और बदलती स्ट्रैटेजी
जून 2025 में यील्ड 6.15% के स्तर पर थी, जो अब बढ़कर 7.18% पर पहुंच गई है। मार्केट के जानकारों का मानना है कि फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स अब इक्विटी की तुलना में अधिक स्टेबल और प्रेडिक्टेबल रिटर्न दे रहे हैं।
फंड हाउस क्या कह रहे हैं?
Axis Mutual Fund के फिक्स्ड इनकम हेड देवांग शाह के मुताबिक, मौजूदा बॉन्ड यील्ड एक अच्छा एंट्री पॉइंट तो है, लेकिन निवेशकों को 6 महीने से अधिक की होल्डिंग अवधि का लक्ष्य रखना चाहिए। वहीं, Aditya Birla Sun Life AMC की को-सीआईओ सुनयना दा कुन्हा लिक्विडिटी पर जोर दे रही हैं। उनका सुझाव है कि निवेशकों को पहले शॉर्ट-ड्यूरेशन फंड्स से शुरुआत करनी चाहिए और फिर 2 से 3 साल की मैच्योरिटी वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड्स की ओर रुख करना चाहिए।
निवेश में जोखिम और चुनौतियां
ICICI Prudential AMC के सीआईओ (फिक्स्ड इनकम) मनीष बंथिया ने एक अहम चेतावनी दी है। उनके अनुसार, भारतीय कॉर्पोरेट बॉन्ड मार्केट में टैक्स स्ट्रक्चर जैसी कई स्ट्रक्चरल बाधाएं हैं, जो रिटेल निवेशकों के लिए कम रेटिंग वाले (Non-AAA) बॉन्ड्स तक पहुंच को मुश्किल बनाती हैं। इसके अलावा, अगर ब्याज दरों (Interest Rates) में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी होती है, तो बॉन्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव निवेशकों के शॉर्ट-टर्म पोर्टफोलियो को प्रभावित कर सकता है।
