बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच दिग्गज म्यूचुअल फंड मैनेजर्स ने लार्ज-कैप शेयरों में अपना निवेश बढ़ाना शुरू कर दिया है। HDFC और ICICI Prudential जैसे फंड हाउस का मानना है कि मौजूदा वैल्युएशन लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए आकर्षक हैं।
भारतीय शेयर बाजार में जारी करेक्शन के दौर में म्यूचुअल फंड मैनेजर्स की रणनीति बदलती दिख रही है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि लार्ज-कैप सेगमेंट के शेयर अब अपने पुराने वैल्युएशन के मुकाबले काफी सस्ते मिल रहे हैं, जो लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए एक अच्छा अवसर हो सकता है।
क्यों बढ़ रहा है भरोसा?
कुछ आंकड़े इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। Nifty 50 का 3 साल का एनुअलाइज्ड रिटर्न अभी 6% पर है, जो 2020 के बाद से सबसे निचला स्तर है। इसके अलावा, BSE Sensex और BSE 500 के मार्केट कैप का अनुपात भी काफी कम स्तर पर बना हुआ है। मार्केट में फैली निराशा को कई फंड हाउस एक 'कंट्ररियन इंडिकेटर' के तौर पर देख रहे हैं, जिसका मतलब है कि बाजार में जल्द रिकवरी आ सकती है।
कॉर्पोरेट अर्निंग्स में भी मजबूती बनी हुई है, जहां अर्निंग्स रिवीजन्स का आंकड़ा 53% है। यह साबित करता है कि कंपनियों का बिजनेस परफॉरमेंस बाजार की मौजूदा कीमतों से कहीं ज्यादा बेहतर है।
फंड हाउस का डेटा क्या कहता है?
- HDFC Mutual Fund ने सितंबर महीने में अपना नेट इक्विटी एक्सपोजर 73% से ज्यादा बनाए रखा है।
- ICICI Prudential Mutual Fund ने भी अपना इक्विटी एलोकेशन 67.2% के मजबूत स्तर पर रखा है।
विदेशी निवेशकों से अलग राह
दिलचस्प बात यह है कि जहां डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) अपनी पोजीशन बढ़ा रहे हैं, वहीं फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) इंडेक्स फ्यूचर्स में अब भी भारी शॉर्ट पोजीशन बनाए हुए हैं। बाजार में यह 'टग-ऑफ-वार' स्थिति बनी हुई है। निवेशकों के लिए अगले कुछ महीनों में कॉर्पोरेट अर्निंग्स की मजबूती और उनकी वैल्युएशन पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा, क्योंकि FPIs की शॉर्ट कवरिंग से बाजार में अचानक बड़ा उछाल आ सकता है।
