भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री अब 60 करोड़ निवेशकों तक पहुंचने का बड़ा लक्ष्य लेकर चल रही है। ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में विशेषज्ञों ने साफ किया है कि छोटे शहरों तक पहुंचने के लिए AI का सहारा तो लिया जाएगा, लेकिन निवेश की सलाह में इंसानी भरोसा आज भी सबसे जरूरी है।
भारतीय म्यूचुअल फंड सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इंडस्ट्री का लक्ष्य अपने मौजूदा 6 करोड़ के यूजर बेस को बढ़ाकर 60 करोड़ तक ले जाने का है। मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में दिग्गजों ने चर्चा की कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इस सफर में अहम भूमिका निभा सकता है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि फाइनेंशियल एडवाइजरी में मशीन कभी इंसान की जगह नहीं ले सकती।
छोटे शहरों में AI की भूमिका
फिलहाल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का एसेट बेस ₹85 लाख करोड़ के पार निकल चुका है। अब चुनौती उन छोटे शहरों तक पहुंचने की है, जहां आज भी लोग पोस्ट ऑफिस की स्कीमों या चिट फंड्स को ही सुरक्षित मानते हैं। AI यहाँ एक पुल का काम करेगा। मीटिंग शेड्यूल करने और फाइनेंशियल डेटा को समराइज करने जैसे कामों को ऑटोमेट करके, डिस्ट्रीब्यूटर्स अपनी कार्यक्षमता बढ़ा सकेंगे और ज्यादा ग्राहकों तक पहुंच पाएंगे।
क्यों सिर्फ AI काफी नहीं है?
विशेषज्ञों का मानना है कि पूरी तरह से डिजिटल या सेल्फ-सर्विस मॉडल जोखिम भरा हो सकता है। खास तौर पर REITs (रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) और InvITs (इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट) जैसे जटिल प्रोडक्ट्स को समझने के लिए गहराई और व्यक्तिगत सलाह की जरूरत होती है। एक एल्गोरिदम शायद इन लंबी अवधि के निवेशों के जोखिम को ठीक से न समझा पाए।
मिस-सेलिंग का खतरा
इंडस्ट्री को इस बात की भी चिंता है कि AI पर ज्यादा निर्भरता से मिस-सेलिंग बढ़ सकती है। अगर मशीन रिसर्च करती है, तो अंतिम सुझाव पर एक इंसान की मुहर और ईमानदारी का होना अनिवार्य है, ताकि वह निवेश ग्राहक के लक्ष्यों के साथ मेल खाए। कुल मिलाकर, भविष्य उसी मॉडल का है जो टेक्नोलॉजी की रफ्तार और इंसानी भरोसे का सही मेल बिठा सके।
