FY26 में 731 म्यूचुअल फंड योजनाओं को हुआ भारी नुकसान, निवेशकों की चिंता बढ़ी

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
FY26 में 731 म्यूचुअल फंड योजनाओं को हुआ भारी नुकसान, निवेशकों की चिंता बढ़ी

साल 2026 के फाइनेंशियल ईयर (FY26) में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए प्रदर्शन के लिहाज से एक मुश्किल साल रहा। इस दौरान 731 म्यूचुअल फंड योजनाओं ने निगेटिव यानी नकारात्मक सालाना रिटर्न दिया, जो पिछले साल के 243 योजनाओं के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा है। हालांकि, इस खराब प्रदर्शन के बावजूद, कुल असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) 12.2% बढ़कर ₹73.73 लाख करोड़ हो गया।

प्रदर्शन में आई भारी गिरावट, 731 योजनाओं को नुकसान

आंकड़ों के मुताबिक, FY26 में 731 म्यूचुअल फंड योजनाओं ने निगेटिव रिटर्न दिया, जबकि FY25 में यह आंकड़ा सिर्फ 243 था। यह साफ दिखाता है कि बाजार की भारी उठापटक का असर निवेशकों के पोर्टफोलियो पर कितना गहरा पड़ा है। अच्छी बात यह रही कि 10% से ज्यादा रिटर्न देने वाली योजनाओं की संख्या घटकर 198 रह गई, जो पिछले साल 304 थी। वहीं, 0% से 5% के बीच नुकसान झेलने वाली योजनाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई।

AUM में उछाल, पर निवेशकों के लिए मिली-जुली तस्वीर

खराब प्रदर्शन के बावजूद, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने साइज के मामले में अच्छी ग्रोथ दिखाई। मार्च 2026 के अंत तक कुल AUM ₹73.73 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले 12.2% की बढ़त है। इस ग्रोथ का एक बड़ा कारण रिटेल निवेशकों की लगातार भागीदारी और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की लोकप्रियता रही। कुल यूनिक निवेशकों की संख्या 13.2% बढ़कर 6.1 करोड़ हो गई, जिसमें टियर-II शहरों से भागीदारी 37.6% बढ़ी। SIP अकाउंट्स की संख्या भी बढ़कर 10.45 करोड़ हो गई।

लालचीपन या डर? रिडेम्पशन में 16.5% की बढ़ोतरी

AUM में बढ़ोतरी और स्कीमों के खराब प्रदर्शन के बीच एक बड़ा अंतर निवेशकों के व्यवहार में बदलाव को दिखाता है। जहां एक ओर नया पैसा लगातार आता रहा, वहीं दूसरी ओर, रिडेम्पशन यानी पैसे निकालने की दर 16.5% बढ़ गई। इससे कुल नेट इनफ्लो 9.7% घटकर ₹7.4 लाख करोड़ रह गया। यह दर्शाता है कि भले ही कई निवेशक लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन के लिए निवेशित रहे, लेकिन बाजार की अनिश्चितता के कारण कई अन्य निवेशकों ने मुनाफा बुक किया या नुकसान उठाकर बाहर निकलना बेहतर समझा।

लावारिस संपत्ति में भी इजाफा

एक और चिंताजनक बात यह है कि लावारिस (unclaimed) म्यूचुअल फंड डिविडेंड में 15.7% की बढ़ोतरी हुई है, जो FY26 के अंत तक ₹2,689 करोड़ तक पहुंच गया। ऐसा अक्सर तब होता है जब निवेशक अपने बैंक अकाउंट या संपर्क विवरण को अपडेट किए बिना फोलियो में बदलाव करते हैं। इसलिए, निवेशकों के लिए यह जरूरी है कि वे अपना KYC और संपर्क विवरण हमेशा अपडेट रखें ताकि वे अपने भुगतानों को सही ढंग से प्राप्त कर सकें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.