म्यूचुअल फंड: इक्विटी में निवेश घटा, ₹24,697 करोड़ का आया नेट इनफ्लो

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AuthorAditya Rao|Published at:
म्यूचुअल फंड: इक्विटी में निवेश घटा, ₹24,697 करोड़ का आया नेट इनफ्लो

भारतीय म्यूचुअल फंड की दुनिया में जुलाई के आंकड़े सामने आ गए हैं। इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम्स में नेट इनफ्लो घटकर **₹24,697 करोड़** रह गया है। यह गिरावट इसलिए भी अहम है क्योंकि पहली बार दिसंबर 2023 के बाद लार्ज-कैप फंड से निवेशकों ने पैसा निकाला है। हालांकि, स्मॉल-कैप और मिड-कैप स्कीम्स रिटेल निवेशकों को लुभाना जारी रखे हुए हैं।

लार्ज-कैप फंड से निकला पैसा

जुलाई महीने का सबसे बड़ा ट्रेंड लार्ज-कैप फंड में देखी गई गिरावट है। दिसंबर 2023 के बाद पहली बार इन फंड्स से ₹1,322 करोड़ का नेट आउटफ्लो (पैसा बाहर निकला) दर्ज किया गया। इससे पता चलता है कि निवेशक बड़ी कंपनियों को लेकर थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं, संभवतः वैल्यूएशन की चिंता या पोर्टफोलियो रोटेशन के कारण। यह पिछले महीनों के बिल्कुल विपरीत है, जहां लार्ज-कैप फंड में लगातार अच्छा इनफ्लो आ रहा था।

स्मॉल और मिड-कैप की मजबूती बरकरार

जहां लार्ज-कैप से निवेशकों ने दूरी बनाई, वहीं स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंड्स में निवेश का आकर्षण बना रहा। स्मॉल-कैप फंड्स में ₹7,768 करोड़ का नेट इनफ्लो आया, जबकि मिड-कैप फंड्स ने जुलाई में ₹6,192 करोड़ जुटाए। इन सेगमेंट्स में लगातार पसंद यह दर्शाती है कि कई निवेशक अभी भी उन क्षेत्रों को टारगेट कर रहे हैं जिनमें ऐतिहासिक रूप से हाई ग्रोथ की संभावना देखी गई है, भले ही इनमें वोलेटिलिटी (उतार-चढ़ाव) का रिस्क ज्यादा होता है।

इंडस्ट्री का बड़ा हाल

कुल मिलाकर, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की टोटल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में मजबूत बढ़ोतरी हुई है, जो 31 जुलाई 2026 तक ₹85.76 लाख करोड़ तक पहुंच गई। इक्विटी इनफ्लो भले ही कम हुए हों, लेकिन डेट-ओरिएंटेड स्कीम्स में भारी वापसी देखी गई, जिन्होंने महीने के दौरान ₹1.87 लाख करोड़ का विशाल नेट इनफ्लो दर्ज किया। यह दिखाता है कि इक्विटी में निवेश थोड़ा धीमा हुआ, पर लिक्विडिटी (पैसा) हाई रही और उसका एक हिस्सा डेट फंड्स में गया।

आगे क्या देखना होगा?

निवेशकों के लिए आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लार्ज-कैप से पैसा निकलना एक छोटा ट्रेंड है या एसेट एलोकेशन में एक बड़े बदलाव की शुरुआत। अगर लार्ज-कैप वैल्यूएशन आकर्षक होते हैं या मिड- और स्मॉल-कैप में ज्यादा वोलेटिलिटी आती है, तो ये ट्रेंड्स पलट सकते हैं। साथ ही, निवेशकों को AMFI द्वारा जारी किए जाने वाले मासिक फ्लो डेटा पर नजर रखनी चाहिए ताकि वे समझ सकें कि अलग-अलग इक्विटी सेगमेंट्स में रिस्क और रिटर्न को लेकर मार्केट सेंटीमेंट कैसे बदल रहा है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.