अगस्त के महीने में भारतीय म्यूचुअल फंड्स ने अपने कैश होल्डिंग्स को घटाकर **₹1.82 लाख करोड़** कर दिया है। बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने अपना भरोसा कायम रखा और SIP के जरिए रिकॉर्ड **₹32,297 करोड़** का निवेश किया गया।
अगस्त 2026 में म्यूचुअल फंड मैनेजरों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए बाजार में बड़ी पूंजी लगाई है। फंड हाउसों के पास मौजूद कुल कैश 4.5% घटकर ₹1.82 लाख करोड़ रह गया है, जो जुलाई में ₹1.91 लाख करोड़ था। साफ है कि बाजार की कमजोरी के बीच मैनेजरों ने कैश बचाने के बजाय शेयरों में पैसा झोंकना बेहतर समझा।
इक्विटी में बदलता ट्रेंड
इक्विटी म्यूचुअल फंड्स में नेट इनफ्लो 19% बढ़कर ₹29,329 करोड़ पर पहुंच गया है। निवेशकों की पहली पसंद इस बार मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंड रहे, जिनमें क्रमशः ₹6,989 करोड़ और ₹7,973 करोड़ का निवेश हुआ। वहीं, लार्ज-कैप फंड्स की हालत अभी भी चिंताजनक है, जहां लगातार दूसरे महीने ₹1,147 करोड़ की निकासी देखी गई।
SIP की मजबूती और डेट फंड्स से दूरी
जहां संस्थागत निवेशकों का रुख मिला-जुला रहा, वहीं रिटेल निवेशक पूरी तरह से मजबूती के साथ डटे रहे। SIP का आंकड़ा ₹32,297 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर (Record High) पर पहुंच गया है। दूसरी ओर, डेट म्यूचुअल फंड्स में बड़ा बदलाव दिखा; जुलाई की तेजी के बाद अगस्त में इन फंड्स से ₹8,127 करोड़ बाहर निकले। यह संकेत है कि कॉरपोरेट और बड़े संस्थान ब्याज दरों की अनिश्चितता के कारण अपना पैसा निकाल रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?
अगस्त का डेटा साफ इशारा कर रहा है कि मार्केट का पैसा अब स्मॉल और मिड-कैप की तरफ शिफ्ट हो रहा है। हालांकि, यह रणनीति पोर्टफोलियो का रिस्क बढ़ा सकती है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या SIP की यह रफ्तार बनी रहती है और क्या लार्ज-कैप फंड्स में निवेशकों का भरोसा वापस लौट पाएगा या नहीं।
