Mutual Fund: क्या आप भी दे रहे हैं फालतू कमीशन? 'Direct SIP' की ओर भाग रहे हैं समझदार निवेशक

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AuthorAditya Rao|Published at:
Mutual Fund: क्या आप भी दे रहे हैं फालतू कमीशन? 'Direct SIP' की ओर भाग रहे हैं समझदार निवेशक

भारतीय निवेशक अब अपनी मेहनत की कमाई को बचाने के लिए रेगुलर प्लान छोड़कर 'Direct Mutual Fund' की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि अभी भी **₹5.73 लाख करोड़** के SIP बेस में रेगुलर प्लान का दबदबा है, लेकिन डायरेक्ट प्लान की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।

भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का ट्रेंड बदल रहा है। डेटा के मुताबिक, सितंबर 2026 तक 5 साल से अधिक समय वाले डायरेक्ट प्लान SIP का हिस्सा बढ़कर 16.6 प्रतिशत हो गया है, जो 2021 में महज 6.9 प्रतिशत था। निवेशक अब डिस्ट्रीब्यूटर्स और एडवाइजर्स को दी जाने वाली कमीशन फीस से बचने के लिए सीधे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) से निवेश करना पसंद कर रहे हैं।

क्यों है डायरेक्ट प्लान फायदेमंद?

डायरेक्ट प्लान का सबसे बड़ा फायदा 'एक्सपेंस रेशियो' (Expense Ratio) है। चूंकि इसमें कोई बिचौलिया नहीं होता, इसलिए सालाना फीस कम हो जाती है। लंबे समय में यह मामूली अंतर आपके पोर्टफोलियो की वैल्यू को काफी बढ़ा सकता है।

क्या रेगुलर प्लान खत्म हो रहे हैं?

फिलहाल ऐसा नहीं है। ₹5.73 लाख करोड़ के कुल SIP एसेट बेस में से ₹4.77 लाख करोड़ अभी भी रेगुलर प्लान में हैं। इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि कई निवेशक आज भी बैंकों और वेल्थ मैनेजर्स की सलाह और मुश्किल समय में मिलने वाली गाइडेंस को अहम मानते हैं।

डेटा में क्या है खास?

  • 4 से 5 साल पुराने SIP में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी बढ़कर 23.7 प्रतिशत हो गई है।
  • 1 साल से कम अवधि वाली नई SIP में डायरेक्ट प्लान का एडॉप्शन रेट 32.3 प्रतिशत पहुंच गया है।

जैसे-जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म बढ़ रहे हैं, डायरेक्ट और रेगुलर प्लान के बीच का अंतर कम हो रहा है। निवेशकों को यह तय करना होगा कि क्या वे खुद निवेश मैनेज करना चाहते हैं या फिर प्रोफेशनल सलाह के लिए अतिरिक्त शुल्क देना सही समझते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.