ग्लोबल ETFs में निवेश करने वाले भारतीय निवेशकों के लिए अलर्ट! सप्लाई लिमिट्स के चलते ये फंड्स अपनी असल कीमत (Fair Value) से कहीं ज्यादा प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान हो सकता है।
ग्लोबल मार्केट्स में निवेश के लिए भारत में लिस्टेड एक्सचेंज-ट्रैडेड फंड्स (ETFs) का क्रेज बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल निवेशकों के लिए एक पेचीदा स्थिति पैदा हो गई है। कई ग्लोबल ETFs की कीमतें उन विदेशी स्टॉक्स के परफॉरमेंस से कहीं ज्यादा तेजी से भाग रही हैं जिन्हें वे ट्रैक करते हैं। आसान भाषा में कहें तो, निवेशक फंड की असली वैल्यू से कहीं ज्यादा पैसा चुकाकर इसे खरीद रहे हैं।
क्यों बढ़ रहा है इतना गैप?
इस गड़बड़ी की मुख्य वजह रेगुलेटरी सप्लाई कंस्ट्रेंट्स हैं। फरवरी 2022 से भारतीय म्यूचुअल फंड्स पर ओवरसीज इन्वेस्टमेंट के लिए $7 बिलियन की सख्त सीमा तय की गई है। फंड हाउस नए यूनिट्स जारी नहीं कर सकते, इसलिए जब मांग बढ़ती है और सप्लाई सीमित रहती है, तो ETF का मार्केट प्राइस उसकी असली नेट एसेट वैल्यू (iNAV) से अलग हो जाता है।
निवेशकों के लिए छुपा हुआ खतरा
अगर आप ₹165 में ऐसा ETF खरीद रहे हैं जिसकी असल वैल्यू सिर्फ ₹100 है, तो आप 65% प्रीमियम दे रहे हैं। यह एक बड़ा ट्रैप है। अगर भविष्य में यह प्रीमियम कम हुआ, तो आपके निवेश की वैल्यू गिर जाएगी, भले ही विदेशी बाजार बढ़ रहे हों।
SEBI के नए नियम और मार्केट्स
सितंबर 8, 2026 को Motilal Oswal Nasdaq Q 50 ETF में 20% का अपर सर्किट लगा, जो इस भारी असंतुलन को दिखाता है। इसे कंट्रोल करने के लिए SEBI ने सितंबर 7, 2026 से नए नियम लागू किए हैं, जिसमें सर्किट लिमिट तय करने के लिए पिछले 30 मिनट के वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) का उपयोग किया जा रहा है।
क्या करें निवेशक?
- ट्रेड करने से पहले फंड हाउस की वेबसाइट पर जाकर iNAV जरूर चेक करें।
- मार्केट ऑर्डर के बजाय हमेशा लिमिट ऑर्डर का उपयोग करें।
- बिड-आस्क स्प्रेड (Bid-Ask Spread) पर नजर रखें, ताकि लिक्विडिटी का सही अंदाजा लग सके।
