अगस्त 2026 में SIP इनफ्लो ने **₹32,297 करोड़** का नया रिकॉर्ड बनाया है और सक्रिय खातों की संख्या **10 करोड़** के पार पहुंच गई है। हालांकि, बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच **53.8 लाख** SIP खातों का बंद होना रिटेल निवेशकों के लिए एक चेतावनी है।
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने अगस्त 2026 में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। SIP के जरिए आने वाला पैसा रिकॉर्ड ₹32,297 करोड़ तक पहुंच गया है। यह निरंतर पूंजी प्रवाह भारतीय शेयर बाजार को स्थिरता देने में बड़ी भूमिका निभा रहा है और अक्सर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली को संतुलित करता है।
रिकॉर्ड इनफ्लो और बढ़ती क्लोजर की समस्या
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में करीब 53.8 लाख SIP खाते या तो बंद हुए या मैच्योर हो गए। यह साल 2026 का अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें से ज्यादातर वे नए निवेशक हैं जो 2 साल से कम समय से बाजार में थे। जैसे ही बाजार में 5% से 10% की गिरावट आती है, ये निवेशक धैर्य खो देते हैं और लंबी अवधि की वेल्थ क्रिएशन के बजाय निवेश रोकना बेहतर समझते हैं।
क्या है 'स्टॉपेज रेशियो'?
इंडस्ट्री की सेहत मापने के लिए 'स्टॉपेज रेशियो' (Stoppage Ratio) देखा जाता है। अगस्त में यह सुधरकर 81% पर आ गया है, जो मई और जून में 90% से ऊपर था। इसका मतलब है कि अब हर 100 नए SIP के मुकाबले बंद होने वाले SIP की संख्या पहले से कम हुई है। यह बताता है कि नए ग्राहक जुड़ने की रफ्तार अभी भी क्लोजर की तुलना में मजबूत बनी हुई है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
बाजार का रुख अब काफी हद तक रिटेल निवेशकों की प्रतिबद्धता पर टिका है। यदि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहता है, तो SIP की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निवेशक निवेश को जारी रखते हैं या नहीं। आने वाले समय में कॉरपोरेट अर्निंग्स और मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर पर नजर रखना जरूरी है। स्मार्ट निवेशक वही है जो गिरावट को घबराहट के रूप में नहीं, बल्कि अपने औसत लागत (Average Cost) को कम करने के अवसर के रूप में देखे।
