रेगुलेटरी बदलाव से खुले नए रास्ते
SEBI का यह महत्वपूर्ण रेगुलेटरी बदलाव REITs को हाइब्रिड कैटेगरी से निकालकर इक्विटी जैसी श्रेणी में लाता है। पहले, एक्टिव फंड्स में REITs का एक्सपोजर सीमित था, लेकिन अब ये इक्विटी इंडेक्स का हिस्सा बन सकते हैं। इसी कदम के चलते NSE का नया Nifty REITs & Realty Index लॉन्च हुआ है, और इंडस्ट्री के जानकारों का मानना है कि 2026 की दूसरी छमाही तक इस इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव फंड्स मार्केट में आ सकते हैं।
Nifty REITs & Realty Index: कंपोजिशन और परफॉरमेंस
यह नया Nifty REITs & Realty Index कुल 15 स्टॉक्स को मिलाकर बनाया गया है। इसमें लिस्टेड REITs का वेटेज करीब 64% है, जबकि DLF और Phoenix Mills जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनियां बाकी हिस्सा हैं। फ्री-फ्लोट मार्केट कैप के आधार पर, इस इंडेक्स ने फरवरी 2026 के अंत तक 12.4% का एनुअलाइज्ड रिटर्न दिखाया है, और इसका डिविडेंड यील्ड लगभग 3.3% है। DLF जैसे स्टॉक्स 30-47x के P/E रेश्यो पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि Phoenix Mills का P/E 49-51x के आसपास है। Embassy Office Parks REIT के P/E रेश्यो 25.1x से 100x से भी ऊपर तक जाते दिख रहे हैं, और Mindspace Business Parks REIT का P/E 31.57x से 64.3x के बीच है।
मार्केट डायनामिक्स: अवसर और चुनौतियां
इस रेगुलेटरी बदलाव से REITs की लिक्विडिटी और मार्केट में उनकी मौजूदगी (visibility) बढ़ने की उम्मीद है। 1 जुलाई 2026 से जब ये ब्रॉडर बेंचमार्क में शामिल होंगे, तो इंडेक्स फंड्स और ETFs से लगातार पैसा आ सकता है। एक्टिव फंड मैनेजर्स के लिए भी यह एक बढ़िया मौका है, क्योंकि वे सेक्टर, थीम या डिविडेंड यील्ड स्ट्रैटेजी में REITs को शामिल कर सकते हैं। भारतीय रियल एस्टेट मार्केट भी मजबूती दिखा रहा है, जहाँ घरों की कीमतों में सालाना 6-7% की बढ़ोतरी और 2026 में ऑफिस लीजिंग में अच्छी मांग रहने का अनुमान है।
लिक्विडिटी और मार्केट डेप्थ की चिंताएं
हालांकि, इंडस्ट्री के लोगों को अभी से डेडिकेटेड REITs-केंद्रित स्कीम लॉन्च करने में कुछ चुनौतियां दिख रही हैं। भारत में लिस्टेड REITs की संख्या सीमित है और इक्विटी मार्केट की तुलना में इनकी लिक्विडिटी भी कम है। यही वजह है कि नए पैसिव फंड्स की एफिशिएंसी और निवेशकों के लिए उनकी अपील पर सवाल उठ रहे हैं। Embassy Office Parks REIT जैसे कुछ REITs का P/E रेश्यो सेक्टर के औसत से ज्यादा लग रहा है, जो वैल्यूएशन को दर्शाता है। रियल एस्टेट एसेट्स इंटरेस्ट रेट साइकिल और इकोनॉमिक शिफ्ट्स के प्रति संवेदनशील होते हैं, जो एक उभरते हुए REIT मार्केट के लिए जोखिम बने हुए हैं।
एक्टिव फंड्स की अहमियत
कुल मिलाकर, Nifty REITs & Realty Index एक महत्वपूर्ण बेंचमार्क तो है, लेकिन मार्केट डेप्थ (liquidity) कम होने के कारण तुरंत डेडिकेटेड पैसिव REIT फंड्स लॉन्च करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में, REITs को मौजूदा डाइवर्सिफाइड इक्विटी पोर्टफोलियो में जोड़ना, खासकर इनकम जेनरेशन के लिए, ज्यादा समझदारी का काम हो सकता है। भारत के रियल एस्टेट मार्केट में लगातार ग्रोथ, अर्बनाइजेशन और सरकारी नीतियों के सपोर्ट के चलते REITs भविष्य में रिटेल इन्वेस्टमेंट्स का एक बड़ा हिस्सा बन सकते हैं, लेकिन फिलहाल सेलेक्टिव एक्टिव मैनेजमेंट ही बेहतर रणनीति दिख रही है।