बाजार की अस्थिरता के बीच दमदार ग्रोथ
अप्रैल 2026 तक, भारत के म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इक्विटी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में 17% की जोरदार बढ़ोतरी हुई और यह करीब ₹49.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह ग्रोथ तब हुई जब शेयर बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे और बाजार में व्यापक भागीदारी को दर्शाता है।
निवेशकों की संख्या में बड़ा इजाफा
पिछले 12 महीनों में, यानी अप्रैल 2026 तक, म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने करीब 71 लाख नए निवेशक जोड़े हैं। यह पिछले साल जोड़े गए 69 लाख निवेशकों से भी ज्यादा है। यह दिखाता है कि लोग अब म्यूचुअल फंड प्रोडक्ट्स में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं और उन पर भरोसा कर रहे हैं। अप्रैल 2026 तक कुल म्यूचुअल फंड फोलियो की संख्या बढ़कर 27.53 करोड़ हो गई।
इक्विटी फंड्स का दबदबा, पैसिव फंड्स की बढ़ती मांग
इक्विटी फंड्स ने अपना दबदबा बनाए रखा और अप्रैल 2026 में कुल एसेट्स का 60.1% हिस्सा इन्हीं का था। वहीं, कुल म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM ₹81.9 लाख करोड़ रहा। एक खास ट्रेंड यह रहा कि पैसिव फंड एसेट्स में 26% की सालाना ग्रोथ दर्ज की गई। ये एसेट्स बढ़कर ₹14.74 लाख करोड़ हो गए, जो अब कुल AUM का 18% है।
फ्लेक्सी-कैप फंड्स में सबसे ज्यादा इनफ्लो, SIPs का जलवा जारी
पिछले एक साल में, फ्लेक्सी-कैप फंड्स कैटेगरी में सबसे ज्यादा नेट इनफ्लो हुआ, जो ₹93,000 करोड़ से अधिक रहा। अकेले अप्रैल 2026 में इन फंड्स में ₹10,000 करोड़ से ज्यादा का निवेश किया गया। इससे पता चलता है कि निवेशक फंड मैनेजर्स की क्षमता पर भरोसा कर रहे हैं। इसके अलावा, SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए निवेश भी मजबूत बना रहा। अप्रैल 2026 में SIP कंट्रीब्यूशन ₹31,115 करोड़ रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 17% ज्यादा है। SIP अकाउंट्स की संख्या बढ़कर 10.44 करोड़ हो गई।
छोटे शहरों से भी बढ़ा निवेश
टॉप 30 शहरों (T30) के बाहर के स्थानों से आने वाले एसेट्स में भी लगातार बढ़ोतरी हुई। अप्रैल 2026 तक यह कुल एसेट्स का 19% पहुंच गया। पिछले छह सालों में B30 शहरों के एसेट्स ने 22% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से ग्रोथ की है, जो T30 बाजारों की 17% ग्रोथ से काफी ज्यादा है। इससे पता चलता है कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी म्यूचुअल फंड्स की पहुंच बढ़ रही है।
इंडस्ट्री की ग्रोथ यात्रा
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM अप्रैल 2016 के ₹14.22 लाख करोड़ से बढ़कर अप्रैल 2026 में ₹81.92 लाख करोड़ हो गया है। पिछले पांच सालों में इंडस्ट्री ने करीब 20% और पिछले दस सालों में 19% की CAGR से ग्रोथ की है। यह अमेरिका की म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री की पिछले दशक की 8% CAGR से काफी बेहतर है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) से मिले इनफ्लो ने ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई है, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) से आउटफ्लो देखा गया।
कुछ चिंताएं भी
लगातार ग्रोथ के बावजूद, SIP टिकट साइज में आई मामूली गिरावट यह संकेत दे सकती है कि निवेशक खर्चों को लेकर ज्यादा सचेत हो रहे हैं या आर्थिक दबाव के कारण वे छोटी रकम निवेश कर रहे हैं। इसके अलावा, हर महीने बड़ी संख्या में SIP अकाउंट्स का बंद होना भी निवेशकों के बीच कुछ अस्थिरता का संकेत दे सकता है, शायद उम्मीद से कम रिटर्न या बाजार में गिरावट जैसे कारणों से।
भविष्य का अनुमान
विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का विस्तार जारी रहेगा। अनुमान है कि यह इंडस्ट्री 2035 तक 16-18% की CAGR से बढ़ते हुए ₹400 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है। B30 शहरों से बढ़ते एसेट्स और पैसिव इन्वेस्टिंग में लगातार ग्रोथ इस भविष्य की तस्वीर के मुख्य चालक माने जा रहे हैं।
