Mutual Fund: रिकॉर्ड ₹85.75 लाख करोड़ के पार पहुंचा AUM, डेट फंड में जबरदस्त वापसी

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Mutual Fund: रिकॉर्ड ₹85.75 लाख करोड़ के पार पहुंचा AUM, डेट फंड में जबरदस्त वापसी

जुलाई 2026 तक भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹85.75 लाख करोड़** के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया है। पिछले साल के मुकाबले इसमें **13.8%** की बढ़ोतरी हुई है। जहां डेट फंडों में भारी इनफ्लो (inflows) देखा गया, वहीं इक्विटी निवेश में थोड़ी नरमी आई, लेकिन निवेशकों ने मंथली SIP के जरिए **₹31,000 करोड़** से ज्यादा का निवेश जारी रखा।

म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने रचा इतिहास

भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने जुलाई 2026 में एक बड़ा मील का पत्थर हासिल किया है। इंडस्ट्री का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर रिकॉर्ड ₹85.75 लाख करोड़ हो गया है। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 13.80% की मजबूत ग्रोथ और पिछले महीने से 4.30% का इजाफा दर्शाता है। इस बढ़त की मुख्य वजह बाजार का अच्छा प्रदर्शन और निवेशकों की लगातार भागीदारी रही है।

डेट फंडों में दिखी वापसी

जुलाई में सबसे बड़ा बदलाव डेट म्यूचुअल फंडों में आया। पिछले कुछ महीनों में हुए आउटफ्लो (outflows) के बाद, इस कैटेगरी ने ₹1.87 लाख करोड़ का शानदार नेट इनफ्लो दर्ज किया। लिक्विड और मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी इस रिकवरी की बड़ी वजह रही। ये वो इंस्ट्रूमेंट्स हैं जहाँ निवेशक अक्सर अपने अतिरिक्त पैसे को थोड़े समय के लिए पार्क करते हैं। यह बदलाव इस साल के शुरुआती महीनों के मुकाबले एसेट एलोकेशन (asset allocation) के व्यवहार में एक बड़ा परिवर्तन दिखाता है, जब इक्विटी पर मुख्य फोकस था।

इक्विटी में नरमी, SIP की स्थिरता

इक्विटी सेगमेंट में ग्रोथ तो जारी रही, लेकिन इसमें थोड़ी नरमी देखने को मिली। जुलाई में निवेशकों ने इक्विटी स्कीम्स में ₹24,697 करोड़ का नेट इनफ्लो किया, जो जून में दर्ज ₹28,973 करोड़ से कम है। नेट फ्लो में इस कमी के बावजूद, रिटेल निवेशकों की भागीदारी स्थिर बनी रही। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIPs) के जरिए मंथली निवेश ₹31,961 करोड़ रहा, जो इस बात को दर्शाता है कि व्यक्तिगत निवेशक लगातार मार्केट में योगदान दे रहे हैं।

इक्विटी में भी, स्मॉलकैप फंड निवेशकों की पहली पसंद बने रहे, जिन्होंने ₹7,768 करोड़ का नेट इनफ्लो आकर्षित किया। इसके विपरीत, लार्ज-कैप फंडों ने नेट आउटफ्लो का अनुभव किया। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक वर्तमान में उन सेगमेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जहाँ उन्हें उच्च ग्रोथ की संभावना दिखती है, भले ही छोटे स्टॉक्स में जोखिम ज्यादा हो।

संपत्ति का मालिकाना हक किसके पास?

इन एसेट्स का मालिकाना हक काफी विविध है। कुल इंडस्ट्री एसेट्स का 37.17% हिस्सा कॉर्पोरेट्स के पास है। इसके बाद हाई नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) का 33.83% हिस्सा है, जबकि रिटेल निवेशकों का योगदान 27% है। बैंकों और वित्तीय संस्थानों के पास 1.92% हिस्सा है, और फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स (FPIs) और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के पास कुल मार्केट का केवल 0.07% हिस्सा है।

निगरानी के लिए जोखिम

हालांकि इंडस्ट्री बढ़ रही है, निवेशकों को कुछ जोखिमों से अवगत रहना चाहिए जो भविष्य के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर स्मॉल-कैप सेगमेंट में वैल्यूएशन (valuations) ऐतिहासिक औसत की तुलना में वर्तमान में ऊंचे हैं, जिससे वे संभावित मार्केट करेक्शन के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं। इसके अलावा, इंडस्ट्री काफी हद तक SIPs के जरिए रिटेल भागीदारी पर निर्भर है; उपभोक्ता भावना में कोई भी बदलाव इनफ्लो की गति को प्रभावित कर सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, घरेलू महंगाई और वैश्विक ब्याज दर चक्र जैसे बाहरी मैक्रोइकोनॉमिक कारक (macroeconomic factors) भी महत्वपूर्ण हैं जिन पर नजर रखने की जरूरत है, क्योंकि ये आने वाले महीनों में डेट और इक्विटी दोनों बाजारों के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.