भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने अगस्त 2026 में **₹87.08 लाख करोड़** के AUM का ऐतिहासिक आंकड़ा छू लिया है। इस तेजी के पीछे **₹32,297 करोड़** का रिकॉर्ड SIP इनफ्लो मुख्य वजह है, हालांकि निवेशकों का रुझान अब लार्ज-कैप से हटकर रिस्की मिड और स्मॉल-कैप फंड्स की ओर ज्यादा बढ़ रहा है।
अगस्त 2026 में भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में ₹87.08 लाख करोड़ का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पिछले एक दशक में इंडस्ट्री ने 19% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) दर्ज की है, जो भारतीय परिवारों की निवेश की बदलती आदतों को दर्शाती है।
SIP का जलवा बरकरार
SIP के जरिए निवेश करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अगस्त में SIP कॉन्ट्रिब्यूशन ₹32,297 करोड़ तक पहुंच गया है, जिसमें प्रति खाता औसत टिकट साइज ₹3,003 रहा। गौर करने वाली बात यह है कि अब 32% SIP एसेट्स को 5 साल से ज्यादा के लिए होल्ड किया जा रहा है, जो निवेशकों के धैर्य का प्रमाण है।
निवेश में रिस्क का बढ़ता दायरा
निवेशकों के पोर्टफोलियो में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। इक्विटी फंड्स का कुल AUM ₹39.25 लाख करोड़ रहा, लेकिन दिलचस्पी की बात यह है कि मिड-कैप फंड्स में ₹6,989 करोड़ और स्मॉल-कैप फंड्स में ₹7,973 करोड़ का नेट इनफ्लो हुआ है। इसके उलट, लार्ज-कैप फंड्स में ₹1,147 करोड़ की निकासी (outflows) देखी गई। इसका सीधा मतलब है कि निवेशक अब ज्यादा रिस्क लेने के मूड में हैं।
SEBI की नजर और लिक्विडिटी मैनेजमेंट
इस बढ़ते रुझान के बीच SEBI लगातार स्मॉल और मिड-कैप फंड्स में स्ट्रेस टेस्टिंग और लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर जोर दे रही है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में किसी भी अस्थिरता के दौरान रिडेम्पशन का दबाव आने पर फंड मैनेजर्स बिना किसी नुकसान के लिक्विडिटी संभाल सकें।
पैसिव फंड्स और छोटे शहरों की धाक
पैसिव फंड्स और इंडेक्स ट्रैकर्स ने 27.2% की शानदार ग्रोथ दर्ज की है, जो अब ₹15.90 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर चुके हैं। वहीं, छोटे शहरों (B30) का योगदान भी तेजी से बढ़ रहा है। B30 शहरों में 24% की 5-वर्षीय CAGR के साथ म्यूचुअल फंड पहुंच 19% AUM तक पहुंच गई है, जो डिजिटल पेनिट्रेशन की सफलता को बयां करती है।
