एक दशक में दस गुना से ज्यादा का उछाल!
भारतीय म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) इंडस्ट्री ने पिछले 10 सालों में अपनी संपत्ति प्रबंधन (AUM) को ₹12 लाख करोड़ (2015) से बढ़ाकर दिसंबर 2025 तक ₹80.23 लाख करोड़ तक पहुंचा दिया है। यह घरेलू बचत की आदतों में बड़े बदलाव का संकेत है, जहां लोग अब भौतिक संपत्ति से हटकर वित्तीय संपत्ति में निवेश करना पसंद कर रहे हैं। इस शानदार ग्रोथ के पीछे लगातार एसआईपी (SIP) के जरिए निवेश, डिजिटल डिस्ट्रिब्यूशन चैनलों का विस्तार और रेगुलेटरी सपोर्ट जैसे अहम कारण रहे हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह ग्रोथ जारी रहेगी और 2026 तक AUM $0.91 ट्रिलियन और 2031 तक $1.27 ट्रिलियन तक पहुँच सकता है।
दिसंबर तिमाही में जोरदार इनफ्लो, कमोडिटी फंड्स चमके
2025 की आखिरी तिमाही में, इंडस्ट्री ने ₹1.92 लाख करोड़ का बड़ा नेट इनफ्लो दर्ज किया। इसमें एक्टिव फंड मैनेजमेंट से ₹1.17 लाख करोड़ और पैसिव स्ट्रेटेजी (Passive Strategies) से ₹75,000 करोड़ आए। इक्विटी फंड्स (Equity Funds) ग्रोथ के मुख्य इंजन बने रहे, जिनमें ₹1.12 लाख करोड़ का निवेश आया। वहीं, कमोडिटी फंड्स (Commodity Funds) ने तो सबको चौंका दिया, जिन्होंने तिमाही-दर-तिमाही 56% की जबरदस्त बढ़ोतरी के साथ ₹33,000 करोड़ का इनफ्लो देखा। यह दिखाता है कि निवेशक अब कमोडिटीज को महंगाई से बचाव और पोर्टफोलियो में डाइवर्सिफिकेशन (diversification) के लिए एक अहम जरिया मान रहे हैं। हाइब्रिड फंड्स (Hybrid Funds) भी मजबूत रहे, जिनमें मल्टी-एसेट फंड्स (Multi-Asset Funds) ने ₹20,000 करोड़ आकर्षित किए।
पैसिव फंड्स का बढ़ता दबदबा
भारतीय म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) बाजार में पैसिव फंड्स (Passive Funds) का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है। 2025 तक, ये इंडस्ट्री के कुल AUM का करीब 18% और इक्विटी फ्लो का 23% हिस्सा बन गए थे। पैसिव फंड्स अपनी कम लागत और सरलता के कारण निवेशकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। कई स्टडीज दिखाती हैं कि लंबी अवधि में कई एक्टिव लार्ज-कैप फंड्स अपने बेंचमार्क को मात देने में नाकाम रहे हैं, जिससे निवेशक ज्यादा फीस वाले एक्टिव मैनेजमेंट पर सवाल उठा रहे हैं।
इकोनॉमी की मजबूत रफ्तार और रेगुलेटरी माहौल
भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत ग्रोथ की ओर बढ़ रही है। गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) के अनुसार, 2026 में रियल जीडीपी (GDP) ग्रोथ 6.9% रहने का अनुमान है, जबकि मूडीज (Moody's) ने FY27 के लिए 6.4% का अनुमान लगाया है। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती G20 अर्थव्यवस्था बनी हुई है। महंगाई भी 2026 में आरबीआई (RBI) के 4% के लक्ष्य के करीब, यानी करीब 3.9% रहने की उम्मीद है। आरबीआई (RBI) ने फरवरी 2026 से रेपो रेट (Repo Rate) को 5.25% पर स्थिर रखा है, जो ग्रोथ के लिए अनुकूल माहौल बना रहा है। अमेरिका के साथ हुए हालिया ट्रेड एग्रीमेंट (Trade Agreement) से भी आर्थिक अनिश्चितताएं कम होने और ग्रोथ को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
संभावित खतरे और जोखिम (Bear Case)
इतनी मजबूत ग्रोथ के बावजूद, कुछ जोखिमों पर ध्यान देना जरूरी है। पैसिव फंड्स का बढ़ता दबदबा जहां लागत कम कर रहा है, वहीं यह मार्केट में अधिक कोरिलेशन (correlation) पैदा कर सकता है और बाजार में बड़ी गिरावट आने पर जोखिम बढ़ा सकता है। कमोडिटी फंड्स में आया तेज इनफ्लो एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन ये फंड्स वैश्विक सप्लाई-डिमांड और भू-राजनीतिक घटनाओं के प्रति बेहद संवेदनशील और अस्थिर होते हैं। जनवरी 2026 में इक्विटी फंड्स में इनफ्लो में थोड़ी नरमी आई है, जिस पर नजर रखने की जरूरत है। साथ ही, वित्तीय संपत्ति की ओर बढ़ते रुझान से अगर सावधानी से प्रबंधन न किया जाए तो घरेलू कर्ज का स्तर भी बढ़ सकता है।
2026 का आउटलुक
मोतीलाल ओसवाल (Motilal Oswal) को 2026 में भारतीय बाजारों में स्थिर ग्रोथ की उम्मीद है। वे फाइनेंशियल, आईटी सर्विसेज और ऑटोमोबाइल जैसे स्ट्रक्चरल ग्रोथ थीम्स वाली क्वालिटी लार्ज-कैप कंपनियों पर फोकस करने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि 2026 में सिर्फ बड़े मार्केट रैलियों पर भरोसा करने के बजाय, सेलेक्टिव एसेट एलोकेशन (asset allocation) और मजबूत स्टॉक पिकिंग (stock picking) रिटर्न के मुख्य चालक होंगे। टियर 2 और टियर 3 शहरों से बढ़ते निवेशक, डिजिटल पहुंच के साथ, इंडस्ट्री की ग्रोथ को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।