Indian Equity Funds: 5 साल में मालामाल! पर जोखिम भी है भारी, जानें क्यों

MUTUAL-FUNDS
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Equity Funds: 5 साल में मालामाल! पर जोखिम भी है भारी, जानें क्यों
Overview

भारतीय इक्विटी फंड्स, खासकर इंफ्रास्ट्रक्चर, मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में, पिछले पांच सालों में दमदार ग्रोथ दिखा रहे हैं। इन 'हाई-ऑक्टेन' फंड्स ने दूसरे निवेशों को पीछे छोड़ते हुए शानदार रिटर्न दिया है। हालांकि, इन फंड्स का कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो (Concentrated Portfolio) इन्हें ज्यादा वोलेटाइल (Volatile) बनाता है, इसलिए ये लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए बेहतर हैं जो जोखिम उठा सकते हैं। इन फंड्स की डिमांड ऊंची बनी हुई है, पर निवेशकों को कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) को गंभीरता से लेना होगा।

Instant Stock Alerts on WhatsApp

Used by 10,000+ active investors

1

Add Stocks

Select the stocks you want to track in real time.

2

Get Alerts on WhatsApp

Receive instant updates directly to WhatsApp.

  • Quarterly Results
  • Concall Announcements
  • New Orders & Big Deals
  • Capex Announcements
  • Bulk Deals
  • And much more

इंफ्रास्ट्रक्चर फंड्स: विकास की नींव पर बने

भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर (Infrastructure) के बढ़ते डेवलपमेंट को देखते हुए, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (ICICI Prudential Infrastructure Fund), फ्रैंकलिन बिल्ड इंडिया फंड (Franklin Build India Fund) और डीएसपी इंडिया टी.आई.जी.ई.आर फंड (DSP India T.I.G.E.R Fund) जैसे फंड्स ने कमाल का प्रदर्शन किया है। ये फंड्स कंस्ट्रक्शन, पावर और ट्रांसपोर्टेशन जैसे सेक्टर्स पर फोकस करते हैं और पिछले पांच सालों में 24% से लेकर 26% से भी ज्यादा का सालाना रिटर्न (CAGR) दे चुके हैं। सरकार का ₹11.21 लाख करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर बजट (FY2025-2026) इस सेक्टर के लिए बूस्टर का काम कर रहा है। हालांकि, ये फंड्स 'वेरी हाई रिस्क' (Very High Risk) कैटेगरी में आते हैं। इनका एक्सपेंस रेशियो (Expense Ratio) भी अक्सर कैटेगरी एवरेज से ज्यादा होता है, जैसे आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड का 1.80% - 2.34% तक।

मिड-कैप फंड्स: ग्रोथ की लहर पर सवार

मिड-कैप (Mid-Cap) सेगमेंट में मोतीलाल ओसवाल मिडकैप फंड (Motilal Oswal Midcap Fund) एक बेहतरीन उदाहरण है। यह फंड ग्रोथ पोटेंशियल वाली स्थापित कंपनियों में निवेश करता है। करीब 30 स्टॉक्स वाले इस फंड ने पिछले पांच सालों में लगभग 22.8% - 24.4% का सालाना रिटर्न (CAGR) दिया है, जो इसके कैटेगरी एवरेज 18% - 19% से काफी बेहतर है। मार्च 2026 तक मिड-कैप स्टॉक्स का कुल इक्विटी एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में हिस्सा लार्ज-कैप स्टॉक्स से आगे निकल जाएगा। पिछले साल के अच्छे प्रदर्शन के बावजूद, मार्केट में आई गिरावट के दौरान इस फंड ने -1.0% से -4.24% का रिटर्न दिया। इसका एक्सपेंस रेशियो 0.85% - 1.61% अपनी कैटेगरी के लिए ठीक-ठाक है।

स्मॉल-कैप फंड्स: हाई रिस्क, हाई रिवॉर्ड

एयूएम (AUM) के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा स्मॉल-कैप (Small-Cap) फंड, निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप फंड (Nippon India Small Cap Fund), जिसकी वैल्यू ₹61,800 करोड़ से भी ज्यादा है, एक मजबूत परफॉर्मर रहा है। इसने पिछले पांच सालों में लगभग 22.3% का सालाना रिटर्न (CAGR) दिया है। स्मॉल-कैप कंपनियां, जो मार्केट कैप के हिसाब से टॉप 250 से बाहर होती हैं, जबरदस्त ग्रोथ की संभावना रखती हैं। मार्च 2026 तक, इक्विटी एयूएम में इनका हिस्सा लार्ज-कैप के करीब पहुंच जाएगा। भारी डिमांड के चलते निप्पॉन इंडिया फंड को निवेश पर कुछ रोक लगानी पड़ी थी। भले ही इसका एक साल का रिटर्न 10.36% रहा हो, पर पांच साल में इसने कैटेगरी एवरेज 18.6% - 19.3% को पीछे छोड़ दिया। स्मॉल-कैप फंड्स में स्वाभाविक रूप से बहुत ज्यादा वोलेटिलिटी (Volatility) होती है और इनमें कम से कम 7 साल का लंबा निवेश नजरिया रखना चाहिए। फंड का एक्सपेंस रेशियो 0.65% से 1.5% तक है, जिस पर ध्यान देना जरूरी है।

मार्केट को डोमेस्टिक इनफ्लो का सहारा

भारतीय म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) में लगातार इनफ्लो (Inflow), खासकर सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान्स (SIPs) के जरिए, रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है। मार्च 2026 में मंथली इनफ्लो ₹32,000 करोड़ को पार कर गया। यह डोमेस्टिक लिक्विडिटी (Domestic Liquidity) फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) के आउटफ्लो को संभालने में मदद करती है। 2026 के लिए इक्विटी मार्केट (Equity Market) का आउटलुक पॉजिटिव है, क्योंकि वैल्यूएशन (Valuations) अपने ऐतिहासिक औसत पर लौट रहे हैं। मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर्स पर सरकार का जोर और मजबूत GDP ग्रोथ, इक्विटी के लिए एक फेवरेबल माहौल बना रहे हैं, हालांकि सेक्टर-वाइज परफॉरमेंस अलग-अलग रहेगी।

कंसंट्रेशन रिस्क को समझना क्यों है जरूरी?

शानदार हिस्टोरिकल रिटर्न्स (Historical Returns) के बावजूद, इन कंसंट्रेटेड फंड्स में बड़े जोखिम छिपे हैं। सबसे बड़ा जोखिम है कंसंट्रेशन रिस्क (Concentration Risk) - यानी कुछ ही स्टॉक्स या सेक्टर्स में निवेश करने से फंड्स में बड़ी गिरावट का खतरा बढ़ जाता है, अगर उनके मुख्य होल्डिंग्स (Core Holdings) में कोई समस्या आती है। डायवर्सिफिकेशन (Diversification) की कमी से नुकसान कई गुना बढ़ सकता है। मिड- और स्मॉल-कैप फंड्स स्वाभाविक रूप से लार्ज-कैप फंड्स की तुलना में ज्यादा वोलेटाइल होते हैं। इसके अलावा, बहुत बड़े एयूएम (AUM) फंड मैनेजर्स के लिए क्षमता की समस्या (Capacity Issues) पैदा कर सकते हैं, जिससे उनकी फ्लेक्सिबिलिटी (Flexibility) कम हो जाती है और कैपिटल को एफिशिएंटली डिप्लॉय करने में दिक्कत आती है। कुछ फंड्स, जैसे आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (2.34% तक) और फ्रैंकलिन बिल्ड इंडिया फंड (2.04% तक), के एक्सपेंस रेशियो कैटेगरी एवरेज से ऊपर हैं, जिससे निवेशकों का रिटर्न कम हो सकता है। जो निवेशक जोखिम से बचना चाहते हैं, उन्हें कंसंट्रेटेड पोर्टफोलियो और हाई एक्सपेंस रेशियो पर खास ध्यान देना चाहिए।

निवेशकों के लिए भविष्य का नज़रिया

2026 के लिए भारत के इक्विटी मार्केट का नज़रिया सावधानी भरा लेकिन पॉजिटिव है, जिसमें डोमेस्टिक लिक्विडिटी और सरकारी पहलों का बड़ा हाथ है। लगातार SIP इनफ्लो रिटेल निवेशकों के भरोसे को दिखाता है। जो निवेशक इन हाई-परफॉर्मिंग, कंसंट्रेटेड फंड्स में निवेश का सोच रहे हैं, उनके पास कम से कम 7+ साल का लंबा निवेश होराइज़न (Horizon) और वोलेटिलिटी झेलने की अच्छी क्षमता होनी चाहिए। फंड मैनेजमेंट, पोर्टफोलियो डायवर्सिफिकेशन और एक्सपेंस रेशियो की बारीकी से जांच करना बेहद जरूरी है। भले ही भारत की ग्रोथ स्टोरी आकर्षक है, लेकिन इन खास फंड कैटेगरीज़ का रास्ता आसान नहीं होगा, जिसके लिए निवेशकों को धैर्य और रिस्क लेने की क्षमता दिखानी होगी।

Get stock alerts instantly on WhatsApp

Quarterly results, bulk deals, concall updates and major announcements delivered in real time.

Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.