ICICI Prudential Value, HSBC Midcap: 22 साल में ₹5 लाख बने ₹2.3 करोड़, लंबी अवधि के निवेश का कमाल!

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ICICI Prudential Value, HSBC Midcap: 22 साल में ₹5 लाख बने ₹2.3 करोड़, लंबी अवधि के निवेश का कमाल!

ICICI Prudential Value Fund और HSBC Midcap Fund ने 22 साल का सफर पूरा कर लिया है। इन फंड्स में 22 साल पहले लगाए गए **₹5 लाख** बढ़कर करीब **₹2.3 करोड़** से ज़्यादा हो गए हैं। यह लंबी अवधि में कंपाउंडिंग की ताकत को दिखाता है, हालांकि, यह भी याद रखना ज़रूरी है कि ये फंड्स ज़्यादा जोखिम वाले हैं और इनकी निवेश रणनीति अलग है।

22 साल की लंबी छलांग: निवेशकों को मिला बंपर रिटर्न!

भारतीय बाज़ार में लंबी अवधि तक निवेशित रहने का असर दिखाने वाली एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। ICICI Prudential Value Fund और HSBC Midcap Fund, ये दो जानी-मानी म्यूचुअल फंड स्कीमें 22 साल की हो गई हैं। इन दोनों फंड्स को अगस्त 2004 में लॉन्च किया गया था और तब से जो निवेशक इनमें टिके रहे, उन्होंने शानदार रिटर्न कमाया है।

ICICI Prudential Value Fund: वैल्यू इन्वेस्टिंग का जादू

ICICI Prudential Value Fund, जिसके पास 31 जुलाई 2026 तक ₹61,102 करोड़ की AUM (Assets Under Management) थी, ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। इस फंड में शुरुआत में लगाए गए ₹5 लाख का निवेश बढ़कर लगभग ₹2.33 करोड़ हो गया है। यह फंड वैल्यू इन्वेस्टिंग की रणनीति पर काम करता है। इसका मतलब है कि फंड मैनेजर ऐसी कंपनियों में पैसा लगाते हैं, जिन्हें उनके असली बिजनेस पोटेंशियल के मुकाबले सस्ता माना जाता है। इस स्ट्रैटेजी में धैर्य की ज़रूरत होती है, क्योंकि बाज़ार को इन कंपनियों की असली वैल्यू समझने में समय लग सकता है।

HSBC Midcap Fund: मिड-कैप ग्रोथ की कहानी

वहीं, HSBC Midcap Fund ने भी लगभग वैसा ही कमाल किया है। 31 जुलाई 2026 तक ₹15,578 करोड़ की AUM वाले इस फंड में भी ₹5 लाख का शुरुआती निवेश बढ़कर लगभग ₹2.26 करोड़ हो गया है। यह फंड मिड-साइज़ कंपनियों पर फोकस करता है, यानी ऐसी कंपनियाँ जो बड़ी दिग्गजों से छोटी तो हैं, लेकिन जिनमें ग्रोथ की ज़बरदस्त क्षमता है। मिड-कैप स्टॉक्स बाज़ार चढ़ने पर अच्छा रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन इनमें बड़ी कंपनियों के मुकाबले ज़्यादा उतार-चढ़ाव (Volatility) भी देखा जाता है।

लंबी अवधि के निवेश की शक्ति और जोखिम

ये आंकड़े निवेशकों को याद दिलाते हैं कि बाज़ार में लंबे समय तक टिके रहने से कितना फायदा हो सकता है। तुलना के लिए, इसी 22 साल की अवधि में Nifty 50 Total Returns Index, जो बाज़ार का एक बेंचमार्क है, में ₹1 लाख का निवेश बढ़कर करीब ₹20.1 लाख हुआ।

हालांकि, यह याद रखना बेहद ज़रूरी है कि ऐसे ऊंचे रिटर्न के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। SEBI के रिस्क-मीटर के मुताबिक, ICICI Prudential Value Fund और HSBC Midcap Fund, दोनों ही 'बहुत ज़्यादा जोखिम' (Very High Risk) वाली कैटेगरी में आते हैं। मिड-कैप स्टॉक्स में आर्थिक मंदी के दौरान बड़ी गिरावट आ सकती है, और वैल्यू स्ट्रैटेजी तब तक अच्छा परफॉर्म नहीं कर सकती जब तक बाज़ार अंडरवैल्यूड स्टॉक्स को पहचान न ले।

आगे क्या देखें?

सिर्फ पिछले रिटर्न को देखकर फैसला लेना सही नहीं है। निवेशकों को फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड, एक्सपेंस रेशियो (फंड मैनेजमेंट की फीस) और फंड की निवेश रणनीति में निरंतरता जैसी चीज़ों पर भी ध्यान देना चाहिए। बाज़ार का माहौल बदलता रहता है, और जो स्ट्रैटेजी पिछले 20 सालों में कामयाब रही, उसे भविष्य में नई चुनौतियां मिल सकती हैं। किसी भी फंड में निवेश का फैसला अपनी वित्तीय ज़रूरतों और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर ही लेना चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.