ICICI Prudential Value Fund ने 22 साल का सफर पूरा कर लिया है। 2004 में सिर्फ ₹1 लाख का निवेश आज ₹46.6 लाख हो गया है। यह फंड वैल्यू-कॉन्ट्रैरियन स्ट्रैटेजी पर चलता है, यानी उन स्टॉक्स को चुनता है जो अपनी असली कीमत से कम पर मिल रहे हों। निवेशकों को समझना होगा कि इस स्ट्रैटेजी में धैर्य की जरूरत होती है, क्योंकि ऐसे स्टॉक्स को पहचान मिलने में समय लग सकता है।
22 साल में 19% से ज्यादा का रिटर्न!
ICICI Prudential Value Fund ने एक बड़ा माइलस्टोन पार किया है - 22 साल का सफर। अगस्त 2004 में लॉन्च हुए इस फंड ने निवेशकों को लगातार शानदार रिटर्न दिया है। 31 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, अगर किसी ने फंड लॉन्च के समय ₹1 लाख का एकमुश्त निवेश किया होता, तो आज वह लगभग ₹46.6 लाख हो गया होता। यह दो दशक की अवधि में 19.11% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के बराबर है।
SIP निवेशकों के लिए क्या है खास?
जो निवेशक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करते हैं, उनके लिए भी नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं। अगर किसी ने 22 सालों तक हर महीने ₹10,000 का SIP किया, तो कुल निवेश ₹26.4 लाख होता। यह निवेश जुलाई 2026 के अंत तक लगभग ₹2.37 करोड़ हो गया, जो निवेश की गई राशि पर 17.04% सालाना रिटर्न के बराबर है।
बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन?
इस फंड की तुलना अक्सर Nifty 50 Total Return Index जैसे बेंचमार्क से की जाती है। फंड ने बेशक दमदार ग्रोथ दिखाई है, लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य की गारंटी नहीं होता। इक्विटी मार्केट की चाल के साथ यह हमेशा बदलता रहता है।
वैल्यू-कॉन्ट्रैरियन स्ट्रैटेजी को समझें
यह फंड वैल्यू-ओरिएंटेड और कॉन्ट्रैरियन निवेश की रणनीति पर काम करता है। फंड मैनेजर (Sankaran Naren, Dharmesh Kakkad, और Masoomi Jhurmarwala) उन कंपनियों को ढूंढते हैं जिनका इंट्रिंसिक वैल्यू, बाजार भाव से ज्यादा होता है। यानी, ये 'अंडरवैल्यूड' स्टॉक्स पर दांव लगाते हैं। मार्केट के ट्रेंड्स को फॉलो करने के बजाय, यह फंड उन बिज़नेस पर फोकस करता है जिन्हें शायद मार्केट ने नजरअंदाज किया हो।
लेकिन, इस स्ट्रैटेजी में रिस्क भी है। वैल्यू इन्वेस्टिंग में 'वैल्यू ट्रैप' का खतरा होता है, जहां स्टॉक लंबे समय तक अंडरवैल्यूड ही रह जाता है क्योंकि मार्केट उसकी क्षमता को नहीं पहचान पाता या कंपनी के फंडामेंटल्स सुधरते नहीं। ऐसे में, अगर चुने हुए स्टॉक्स तेजी से ऊपर नहीं गए, तो इस फंड का रिटर्न ब्रॉडर मार्केट से पीछे रह सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
SEBI के रिस्क-मीटर के अनुसार, यह फंड 'बहुत ज्यादा' (Very High) रिस्क कैटेगरी में आता है। फंड का सेक्टर एक्सपोजर (जैसे फाइनेंशियल सर्विसेज, हेल्थकेयर, और कंज्यूमर गुड्स) भी बदलता रहता है, क्योंकि मैनेजर हमेशा बेहतर 'वैल्यू' के अवसरों की तलाश में रहते हैं।
निवेशकों के लिए सबसे जरूरी है कि वे फंड मैनेजर की कमेंट्री पर नजर रखें, खासकर मार्केट वैल्यूएशन को लेकर। कॉन्ट्रैरियन स्ट्रैटेजी के कारण, फंड का पोर्टफोलियो समय के साथ काफी बदल सकता है। फंड की तिमाही रिपोर्ट और पोर्टफोलियो में होने वाले बदलावों पर नजर रखने से निवेशकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि फंड मौजूदा मार्केट में खुद को कैसे पोजिशन कर रहा है।
