ICICI Prudential Flexicap Fund ने अपनी निवेश रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। फंड ने स्मॉल-कैप शेयरों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर **24.47%** कर दी है, जो कैटेगरी के औसत से काफी ज़्यादा है। यह कदम डोमेस्टिक डिमांड वाले सेक्टर्स जैसे ऑटोमोबाइल और रिटेल से लंबी अवधि में ग्रोथ हासिल करने के लिए उठाया गया है।
तीन साल में बदली रणनीति
पिछले तीन सालों में, ICICI Prudential Flexicap Fund ने स्मॉल-कैप स्टॉक्स पर अपना फोकस काफी बढ़ाया है। फंड का स्मॉल-कैप कंपनियों में एक्सपोजर 9.70% से बढ़कर 24.47% हो गया है, जो फ्लेक्सी-कैप कैटेगरी के औसत से काफी आगे है। इसी दौरान, फंड ने लार्ज-कैप होल्डिंग्स को 76.99% से घटाकर 62.59% कर दिया है, जबकि मिड-कैप एलोकेशन 9.71% पर बना हुआ है। इस री-एलोकेशन का मुख्य मकसद घरेलू ग्रोथ के अवसरों का फायदा उठाना है।
सेक्टर पर दांव और पोर्टफोलियो
फंड का पोर्टफोलियो अब उन सेक्टर्स पर केंद्रित है जो डोमेस्टिक कंजम्पशन और मोबिलिटी से जुड़े हैं। ऑटोमोबाइल्स में 18.41% का निवेश है, इसके बाद बैंक्स में 16.99%, रिटेल में 10.75%, और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स व ऑटो कंपोनेंट्स में 14.40% का निवेश किया गया है। यह सेक्टरल अप्रोच आम फ्लेक्सी-कैप कैटेगरी से अलग है, जहाँ आमतौर पर सॉफ्टवेयर और फार्मा में ज़्यादा वेटेज होता है। फंड का तरीका 60-65% का एक कोर ग्रोथ पोर्टफोलियो बनाने पर केंद्रित है, जिसमें साइक्लिकल और कॉन्ट्रैरियन दांव भी शामिल हैं। हाल के पोर्टफोलियो एडजस्टमेंट में Tata Motors और Trent जैसी कंपनियों में पोजीशन बढ़ाई गई है, जबकि कंस्ट्रक्शन और टेलीकॉम से एक्सपोजर कम किया गया है।
प्रदर्शन और वैल्यूएशन
जुलाई 2021 में लॉन्च होने के बाद से, फंड ने लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है। पिछले तीन सालों में इसका रोलिंग रिटर्न 18.86% रहा है, जो Nifty 500 TRI के 16.14% और फ्लेक्सी-कैप कैटेगरी के औसत 15.80% से बेहतर है। ₹22,500 करोड़ के एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ, फंड एक कंसंट्रेटेड स्ट्रैटेजी अपनाता है, जिसमें टॉप 10 स्टॉक्स कुल होल्डिंग्स का 45.27% हैं।
हालांकि, यह प्रदर्शन वैल्यूएशन और जोखिम के साथ आता है। फंड का पोर्टफोलियो फिलहाल 45.5 गुना अर्निंग्स पर ट्रेड कर रहा है, जो पियर एवरेज 38.7 गुना से ज़्यादा है। यह ज़्यादा वैल्यूएशन, खासकर कंज्यूमर और स्मॉल-कैप सेगमेंट में, पोर्टफोलियो को अर्निंग मिस के प्रति संवेदनशील बना सकता है। इसके अलावा, स्मॉल-कैप स्टॉक्स में ₹5,500 करोड़ का निवेश संभावित लिक्विडिटी जोखिम पैदा करता है, क्योंकि बाजार में तनाव के दौरान छोटी कंपनियों में ट्रेड करना मुश्किल हो सकता है। फंड डायरेक्ट प्लान के लिए 0.67% और रेगुलर प्लान के लिए 1.39% का एक्सपेंस रेश्यो लेता है।
निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि फंड इन वैल्यूएशन दबावों और लिक्विडिटी जोखिमों को कैसे मैनेज करता है, खासकर अगर बाजार में अस्थिरता बढ़ती है। फंड का प्रदर्शन उसके चुने हुए कंजम्पशन-लेड सेक्टर्स की ग्रोथ और स्टॉक-पिकिंग स्ट्रैटेजी के सफल एग्जीक्यूशन पर निर्भर करेगा।
