ICICI Prudential NASDAQ 100 Index Fund ने पिछले एक साल में **35.4%** का शानदार रिटर्न दिया है। इसने अपने बेंचमार्क और कई अन्य फंड्स को पीछे छोड़ दिया है। हालांकि, इस फंड में निवेश से पहले टेक्नोलॉजी में भारी कंसंट्रेशन, करेंसी के उतार-चढ़ाव और टैक्स नियमों जैसे जोखिमों पर गौर करना ज़रूरी है।
ICICI Prudential NASDAQ 100 Index Fund का दमदार प्रदर्शन
ICICI Prudential NASDAQ 100 Index Fund ने अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 35.4% का ज़बरदस्त रिटर्न दर्ज किया है। यह इस फंड को बड़े इंडेक्स फंड्स में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में से एक बनाता है। यह परफॉरमेंस NASDAQ-100 इंडेक्स को ट्रैक करने वाली अमेरिकी टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर कंपनियों की हालिया मजबूती को दर्शाता है, जिसका लक्ष्य यह फंड भी रखता है।
बेंचमार्क और पीयर्स को पछाड़ कर आगे
फाइनेंशियल डेटा के अनुसार, फंड ने पिछले एक साल में अपने बेंचमार्क इंडेक्स को 10% से ज़्यादा के अंतर से लगातार पीछे छोड़ा है। तीन साल के लिहाज़ से भी फंड ने यह ट्रेंड बनाए रखा है। ओवरऑल मार्केट में, यह परफॉरमेंस इसे Motilal Oswal S&P 500 Index Fund और Motilal Oswal BSE Enhanced Value Index Fund जैसे फंड्स से बेहतर स्थिति में रखता है। हालांकि, एक या तीन महीने जैसे छोटे समय-सीमाओं में दूसरे इंडेक्स फंड्स ने ज़्यादा रफ्तार दिखाई है।
निवेश से पहले इन जोखिमों पर करें विचार
अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स फंड्स में निवेश करने वाले निवेशकों को सिर्फ पिछले साल के रिटर्न से आगे देखना चाहिए। NASDAQ-100 को ट्रैक करने की वजह से, इस फंड का पोर्टफोलियो टेक्नोलॉजी और कंज्यूमर सर्विस सेक्टर में बहुत ज़्यादा केंद्रित (concentrated) है। इस कंसंट्रेशन से पोर्टफोलियो सेक्टर-स्पेसिफिक साइकल्स के प्रति ज़्यादा संवेदनशील हो जाता है, यानी टेक इंडस्ट्री में गिरावट आने पर फंड की वैल्यू पर व्यापक मार्केट इंडेक्स की तुलना में ज़्यादा असर पड़ सकता है।
करेंसी का खेल और टैक्स का गणित
भारतीय निवेशकों के लिए एक और महत्वपूर्ण फैक्टर करेंसी रिस्क है। चूंकि फंड की एसेट्स अमेरिकी डॉलर में हैं, इसलिए रुपये में इसका रिटर्न सिर्फ अमेरिकी कंपनियों के शेयर की कीमतों के उतार-चढ़ाव से ही नहीं, बल्कि रुपये और डॉलर के एक्सचेंज रेट से भी प्रभावित होता है। अगर रुपया डॉलर के मुकाबले मज़बूत होता है, तो अमेरिकी शेयरों के अच्छा प्रदर्शन करने पर भी भारतीय निवेशकों के लिए फंड के रिटर्न में कमी आ सकती है।
अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड को हाई-रिस्क इन्वेस्टमेंट माना जाता है, जिसमें आमतौर पर मार्केट की अस्थिरता से निपटने के लिए 5 साल या उससे ज़्यादा के निवेश होराइजन की ज़रूरत होती है। टैक्स की बात करें तो, इन फंड्स से होने वाली कमाई पर भारत में कैपिटल गेन्स टैक्स लगता है, और अंतरराष्ट्रीय फंड्स के टैक्स नियम घरेलू इक्विटी फंड्स से अलग हो सकते हैं। निवेशकों को लेटेस्ट टैक्स स्ट्रक्चर की जांच करनी चाहिए, जिसमें 12.5% लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स भी शामिल है, क्योंकि ये लागतें हाथ में आने वाले असल रिटर्न को प्रभावित कर सकती हैं। आगे चलकर सबसे महत्वपूर्ण इंडिकेटर फंड के ट्रैकिंग एरर की लॉन्ग-टर्म कंसिस्टेंसी और अमेरिकी इक्विटी मार्केट की अंतर्निहित अस्थिरता को मैनेज करने की उसकी क्षमता रहेगी।
