ICICI Pru NASDAQ 100 Fund: 31% CAGR के साथ टॉप परफॉर्मर, जानिए क्यों?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ICICI Pru NASDAQ 100 Fund: 31% CAGR के साथ टॉप परफॉर्मर, जानिए क्यों?

ICICI Prudential NASDAQ 100 Index Fund ने पिछले 3 सालों में **31%** का शानदार एनुअल रिटर्न (CAGR) दर्ज किया है, जिससे यह अपने सेगमेंट में सबसे आगे निकल गया है। **₹1,500 करोड़** से ज़्यादा AUM वाले फंड्स की लिस्ट में इसने बाज़ी मारी है।

ICICI Pru NASDAQ 100 Fund का दमदार प्रदर्शन

ICICI Prudential NASDAQ 100 Index Fund ने लार्ज-कैप इंडेक्स फंड्स के बीच ज़बरदस्त परफॉर्मेंस दिखाई है। पिछले तीन सालों में इस फंड ने 31% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है, जो कि इसके बेंचमार्क इंडेक्स के 25.3% रिटर्न से काफी ज़्यादा है। 6 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, यह फंड भारतीय निवेशकों के लिए उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय और थीमेटिक इंडेक्स फंड्स में सबसे आगे है।

दूसरे फंड्स और AUM का कंपेरिजन

मार्केट एनालिस्ट्स के अनुसार, ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले इंडेक्स फंड्स में Motilal Oswal AMC का दबदबा रहा। Motilal Oswal BSE Enhanced Value Index Fund और Motilal Oswal S&P 500 Index Fund ने क्रमशः 25.7% और 25.1% का तीन-साला रिटर्न दिया। ICICI फंड का AUM ₹3,629.6 करोड़ है, जबकि Motilal Oswal S&P 500 Index Fund ₹4,580.4 करोड़ के साथ इस ग्रुप में सबसे बड़ा फंड है।

अंतरराष्ट्रीय फंड्स की परफॉर्मेंस के पीछे के कारण

तीन साल के शानदार रिकॉर्ड के अलावा, ICICI Pru NASDAQ 100 Index Fund ने पिछले एक साल में भी 43.5% का रिटर्न दिया, जबकि इसके बेंचमार्क ने 29.6% का रिटर्न दर्ज किया। अंतरराष्ट्रीय फंड्स में ऐसे रिटर्न का मुख्य कारण NASDAQ 100 इंडेक्स में अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों का बड़ा वेटेज है। चूँकि ये फंड विदेशी बेंचमार्क को ट्रैक करते हैं, इसलिए निवेशकों को करेंसी में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियमों में बदलाव जैसे जोखिमों का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, लॉन्ग-टर्म परफॉर्मेंस एक अहम इंडिकेटर है, लेकिन शॉर्ट-टर्म ट्रेंड्स अलग-अलग नतीज़े दिखा सकते हैं। उदाहरण के लिए, Motilal Oswal Nifty Microcap 250 Index Fund ने हाल ही में एक महीने और तीन महीने में क्रमशः 6.2% और 25.9% का रिटर्न देकर टॉप किया है।

निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय इंडेक्स फंड्स RBI के विदेशी निवेश की सीमा के अधीन हैं। भविष्य में ऐसे फंड्स में निवेश पर कोई रोक या टैक्स नियमों में बदलाव से रिटेल निवेशकों की लिक्विडिटी और नेट रिटर्न पर असर पड़ सकता है। फंड के एक्सपेंस रेशियो और ट्रैकिंग एरर (फंड रिटर्न और बेंचमार्क इंडेक्स के बीच का अंतर) पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।

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