ICICI Prudential MF: मार्केट की उथल-पुथल से निपटने के लिए ICICI Pru की नई 'SIF' पेशकश, जानिए क्यों हैं ये खास?

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
ICICI Prudential MF: मार्केट की उथल-पुथल से निपटने के लिए ICICI Pru की नई 'SIF' पेशकश, जानिए क्यों हैं ये खास?
Overview

ICICI Prudential Mutual Fund ने मार्केट की अनिश्चितता और उथल-पुथल से निपटने के लिए दो नए Specialized Investment Funds (SIFs) लॉन्च किए हैं। iSIF Active Asset Allocator Long-Short Fund और iSIF Equity Long-Short Fund नाम के ये फंड्स अनुभवी निवेशकों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं और SEBI के SIF फ्रेमवर्क के तहत काम करेंगे, जिससे डेरिवेटिव्स और शॉर्ट-सेलिंग जैसी एडवांस्ड स्ट्रैटेजीज का इस्तेमाल संभव होगा।

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आज की तेज़ रफ़्तार और अनिश्चित बाज़ारों में, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने और बेहतर रिटर्न जेनरेट करने के लिए नए और एडवांस्ड टूल्स की ज़रूरत है। इसी ज़रूरत को समझते हुए, ICICI Prudential Mutual Fund ने दो नए Specialized Investment Funds (SIFs) लॉन्च किए हैं: iSIF Active Asset Allocator Long-Short Fund और iSIF Equity Long-Short Fund।

SEBI ने अप्रैल 2025 में Specialized Investment Fund (SIF) फ्रेमवर्क पेश किया था। यह पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स और पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) या अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) के बीच एक सेतु का काम करता है। इस ढांचे के ज़रिए फंड हाउसेस को लॉन्ग-शॉर्ट इक्विटी, डायनामिक एसेट एलोकेशन और टैक्टिकल सेक्टर रोटेशन जैसी स्ट्रैटेजीज़ अपनाने की आज़ादी मिलती है। वे हेजिंग (hedging) और स्ट्रेटेजिक पोजीशनिंग के लिए डेरिवेटिव्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। SIFs के लिए न्यूनतम निवेश ₹10 लाख रखा गया है, जो स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि ये फंड्स अनुभवी निवेशकों के लिए हैं जो ज़्यादा जोखिम और जटिलता को समझ सकते हैं।

ICICI Prudential AMC के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CIO, Sankaran Naren के मुताबिक, बाज़ार में लगातार बनी रहने वाली अस्थिरता के कारण ऐसी फ्लेक्सिबल स्ट्रैटेजीज़ की ज़रूरत बढ़ गई है। iSIF Active Asset Allocator Long-Short Fund इक्विटी, डेट, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) के बीच निवेश बदल सकता है। यह फंड 100% तक डेरिवेटिव्स में निवेश कर सकता है और अपनी नेट एसेट्स के 25% तक की सीमित अनहेज़्ड शॉर्ट पोजीशन भी ले सकता है। वहीं, iSIF Equity Long-Short Fund इक्विटी पर फोकस करेगा, जिसमें 35% तक विदेशी निवेश की अनुमति होगी और शॉर्ट एक्सपोज़र के लिए डेरिवेटिव्स का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इन स्ट्रैटेजीज़ का मकसद बाज़ार में तेज़ उतार-चढ़ाव के दौरान भी रिटर्न जेनरेट करना, डाउनसाइड रिस्क को मैनेज करना और रेगुलर इक्विटी या डेट फंड्स की तुलना में एक अलग रिस्क-रिटर्न प्रोफाइल पेश करना है।

ICICI Prudential AMC एक ऐसे बढ़ते हुए बाज़ार में कदम रख रहा है जहाँ कई फंड हाउसेस SIFs को अपना रहे हैं। Quant Mutual Fund ने सितंबर 2025 में भारत का पहला SIF, qSIF Equity Long-Short Fund लॉन्च किया था। इसके अलावा, SBI Mutual Fund, Edelweiss Mutual Fund, ITI Mutual Fund और 360 ONE Mutual Fund जैसे बड़े AMC भी इसी तरह के हाइब्रिड और लॉन्ग-शॉर्ट इक्विटी स्ट्रैटेजी वाले SIF प्रोडक्ट्स लॉन्च कर चुके हैं या करने की योजना बना रहे हैं। यह इन एडवांस्ड प्रोडक्ट्स के लिए बढ़ती बाज़ार स्वीकार्यता को दर्शाता है। हालांकि, कुछ शुरुआती SIF इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट फंड्स के परफॉरमेंस मिले-जुले रहे हैं, जिसका एक कारण 2025 के मध्य से 2026 की शुरुआत तक का मुश्किल बाज़ार माहौल रहा जिसने ज़्यादातर इक्विटी-केंद्रित स्ट्रैटेजीज़ को प्रभावित किया। विश्लेषकों का मानना है कि SIFs एक वैल्यूएबल, रेगुलेटेड टूल हैं जो कुल पोर्टफोलियो की अस्थिरता को कम करने के लिए 5-10% तक का हिस्सा बन सकते हैं। भारत के दूसरे सबसे बड़े AMC के तौर पर, ICICI Prudential AMC अपने व्यापक डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क और विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए इस ट्रेंड से फायदा उठाने की मज़बूत स्थिति में है। SIFs म्यूचुअल फंड्स की तरह टैक्स एफिशिएंट (tax efficient) होते हैं और फ्लेक्सिबिलिटी भी देते हैं, जिससे ये हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) के लिए आकर्षक बनते हैं।

हालांकि, SIFs में महत्वपूर्ण जोखिम भी जुड़े हुए हैं। ₹10 लाख के न्यूनतम निवेश की सीमा के कारण ये फंड्स ज़्यादातर रिटेल निवेशकों की पहुँच से बाहर हैं। डेरिवेटिव्स और शॉर्ट-सेलिंग से जुड़ी स्ट्रैटेजीज़ कॉम्प्लेक्स होती हैं और इनमें पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स की तुलना में पूंजी के नुकसान और लिक्विडिटी (liquidity) के मुद्दे का ज़्यादा खतरा हो सकता है। भले ही SIFs ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी देते हैं, लेकिन उनके परफॉरमेंस के ट्रैक रिकॉर्ड अभी नए हैं। कुछ शुरुआती इक्विटी लॉन्ग-शॉर्ट SIFs अपने बेंचमार्क को पार नहीं कर पाए हैं, यह दर्शाता है कि एडवांस्ड स्ट्रैटेजीज़ हमेशा बेहतर नतीजे नहीं देतीं, खासकर बाज़ार में गिरावट के दौरान। रेगुलेटरी नियम, भले ही मज़बूत हों, डेरिवेटिव्स और शॉर्टिंग पर सीमाएं भी लगाते हैं। मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स पर केंद्रित स्ट्रैटेजीज़ में, हेजिंग के बावजूद, ज़्यादा अस्थिरता का सामना करना पड़ सकता है। इन प्रोडक्ट्स का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए निवेशकों को बाज़ार चक्रों की गहरी समझ और जोखिम के प्रति उच्च सहनशीलता की आवश्यकता है।

जैसे-जैसे SIF कैटेगरी विकसित हो रही है, विश्लेषकों को उम्मीद है कि फंड हाउसेस नई स्ट्रैटेजीज़ को लगातार इनोवेट और रिफाइन करते रहेंगे। विभिन्न बाज़ार परिस्थितियों में मज़बूत रिटर्न का लक्ष्य रखने वाले और अस्थिरता को संभालने में सक्षम निवेश विकल्पों की मांग बढ़ने की संभावना है। भले ही कुछ SIF प्रकारों के शुरुआती परफॉरमेंस डेटा मिले-जुले रहे हों, SIFs के टोटल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) में अप्रैल 2026 तक लगभग ₹12,255 करोड़ की वृद्धि हुई है। ICICI Prudential AMC का इस क्षेत्र में प्रवेश, अनुभवी निवेशकों के लिए और अधिक प्रोडक्ट्स पेश करने और अप्रत्याशित बाज़ार में अधिक स्थिर पोर्टफोलियो बनाने के लिए टूल प्रदान करने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.