ICICI Prudential Pharma Healthcare & Diagnostics Fund ने पिछले 3 सालों में **25.4%** का सालाना रिटर्न देकर अपने बेंचमार्क और दूसरे बड़े फंड्स को पीछे छोड़ दिया है। यह फंड हेल्थकेयर सेक्टर में अपनी बेहतरीन रणनीति का सबूत है, हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि किसी एक सेक्टर पर फोकस वाले फंड में डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के मुकाबले ज्यादा रिस्क होता है।
3 साल में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन
ACE MF के आंकड़ों के अनुसार, ICICI Prudential Pharma Healthcare & Diagnostics (P.H.D) Fund ने 3 साल की अवधि में, जो जुलाई 2026 तक है, 25.4% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज किया है। यह रिटर्न इसके बेंचमार्क इंडेक्स से काफी बेहतर है, जिसने इसी अवधि में 9.2% का रिटर्न दिया था। यानी, ICICI Pru फंड ने 16.2% ज्यादा का आउटपरफॉर्मेंस दिखाया है।
साथियों को दी मात
लंबे समय के रिटर्न के मामले में ICICI Pru फंड अपने सेक्टर के दूसरे बड़े फंड्स से आगे निकल गया है। इसी 3 साल की अवधि में, SBI Healthcare Opp Fund ने 24.3% और Mirae Asset Healthcare Fund ने 23.3% का रिटर्न दिया। तुलना को सटीक रखने के लिए, ₹1,500 करोड़ से ज्यादा की एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) वाले फंड्स पर ध्यान दिया गया। इस ग्रुप में Nippon India Pharma Fund सबसे बड़ा फंड हाउस है, जो करीब ₹8,635.7 करोड़ का फंड मैनेज कर रहा है।
छोटी अवधि के उलट हाल
जहां ICICI Pru P.H.D Fund 3 साल के नजरिए से सबसे ऊपर है, वहीं छोटी अवधि में तस्वीर थोड़ी अलग है। उदाहरण के लिए, SBI Healthcare Opp Fund ने पिछले कुछ महीनों में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसने 1 महीने में 8.9% और 3 महीने में 21.3% का रिटर्न दिया है। साथ ही, 1 साल की अवधि में भी SBI फंड ने 14.9% का गेन दर्ज किया, जबकि ICICI Pru फंड के 1 साल के प्रदर्शन पर इसके बेंचमार्क का असर दिखा, जिसने -4.0% का निगेटिव रिटर्न दिया था।
सेक्टर-स्पेसिफिक फंड्स में निवेश का जोखिम
यह याद रखना ज़रूरी है कि सेक्टर-स्पेसिफिक म्यूचुअल फंड, डाइवर्सिफाइड इक्विटी फंड से अलग होते हैं। चूंकि ये फंड्स फार्मा, हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक इंडस्ट्रीज में ही अपना निवेश केंद्रित करते हैं, इसलिए इनका प्रदर्शन सीधे तौर पर इन खास बिज़नेस की उठापटक से जुड़ा होता है। अगर हेल्थकेयर सेक्टर में रेगुलेटरी बदलाव, प्राइसिंग प्रेशर या डिमांड की चुनौतियां आती हैं, तो फंड की वैल्यू ब्रॉड-मार्केट फंड के मुकाबले ज्यादा तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती है। छोटी और लंबी अवधि के प्रदर्शन में यह अंतर दिखाता है कि सेक्टर के हालात कितनी जल्दी बदल सकते हैं। इन फंड्स पर नजर रखने वाले निवेशकों को फंड मैनेजर के लॉन्ग-टर्म ट्रैक रिकॉर्ड के साथ-साथ हेल्थकेयर सेक्टर के मौजूदा ट्रेंड्स पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि वे समझ सकें कि ये फैक्टर्स भविष्य की वोलेटिलिटी और रिटर्न को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
