ICICI Pru Gilt Fund का दमदार प्रदर्शन: 1 साल में **5.3%** रिटर्न, बना टॉप परफॉर्मर

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AuthorMehul Desai|Published at:
ICICI Pru Gilt Fund का दमदार प्रदर्शन: 1 साल में **5.3%** रिटर्न, बना टॉप परफॉर्मर

ICICI Prudential Gilt Fund ने शॉर्ट और मिड-टर्म गिल्ट कैटेगरी में अपना दबदबा कायम किया है। फंड ने पिछले एक साल में **5.3%** का शानदार रिटर्न दिया है। **₹8,890 करोड़** की एसेट बेस वाला यह फंड सरकारी बॉन्ड में निवेश की ताकत दिखाता है, हालांकि निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ब्याज दरों में बदलाव के साथ इस कैटेगरी में रिटर्न ऊपर-नीचे होता रहता है।

गिल्ट फंड में ICICI Pru का जलवा

हाल के आंकड़ों के मुताबिक, ICICI Prudential Gilt Fund ने शॉर्ट और मिड-टर्म डेट कैटेगरी में दमदार परफॉरमेंस दिखाई है। इस फंड ने पिछले एक महीने में 0.2% का रिटर्न दर्ज किया है, जो लगातार अपने बेंचमार्क से बेहतर रहा है। वहीं, एक साल की अवधि में फंड ने 5.3% का रिटर्न दिया है, जो इसके बेंचमार्क रिटर्न 2.9% से 2.4% ज्यादा है।

फंड का साइज़ और मार्केट पोजीशन

यह फंड ₹8,890.1 करोड़ की भारी-भरकम रकम मैनेज कर रहा है, जिससे यह अपनी कैटेगरी के सबसे बड़े फंड्स में से एक बन गया है। निवेशकों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दर्शाता है कि काफी सारे मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने सरकारी बॉन्ड में निवेश के लिए इस फंड को चुना है। बड़ा एसेट बेस फंड मैनेजर को सरकारी सिक्योरिटीज में पूंजी लगाने में मदद करता है, जिससे हाई लिक्विडिटी बनी रहती है और मार्केट की चालों का सामना करने के लिए पोर्टफोलियो का आकार पर्याप्त रहता है।

निवेश की रणनीति को समझें

गिल्ट फंड मुख्य रूप से सरकारी सिक्योरिटीज में पैसा लगाते हैं। चूंकि ये बॉन्ड सरकार जारी करती है, इसलिए इन पर सॉवरेन गारंटी होती है। इसका मतलब है कि इन पर डिफ़ॉल्ट का खतरा लगभग न के बराबर होता है। कंजर्वेटिव निवेशकों के लिए, यह एक अच्छा विकल्प है, खासकर उन प्रोडक्ट्स के मुकाबले जहां कॉर्पोरेट क्रेडिट रिस्क हो सकता है। फिलहाल, इस फंड को मनीष बंथिया (Manish Banthia) और रौनक सुराना (Raunak Surana) मैनेज कर रहे हैं, जो इन एसेट्स के आवंटन की देखरेख करते हैं।

जोखिमों पर भी डालें नज़र

हालांकि गिल्ट फंड क्रेडिट रिस्क को खत्म कर देते हैं, पर ये मार्केट रिस्क से मुक्त नहीं हैं। इन फंड्स का परफॉरमेंस सीधे तौर पर ब्याज दरों से जुड़ा होता है। जब अर्थव्यवस्था में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो बॉन्ड की कीमतें आमतौर पर गिरती हैं, जिससे फंड के रिटर्न पर असर पड़ सकता है। इसके विपरीत, जब दरें गिरती हैं, तो बॉन्ड की कीमतें बढ़ जाती हैं। इस वजह से, फंड का रिटर्न रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी और व्यापक आर्थिक रुझानों के प्रति संवेदनशील होता है। एक सामान्य बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट के विपरीत, जहां ब्याज दर तय और अनुमानित होती है, गिल्ट फंड का रिटर्न मार्केट की स्थितियों के आधार पर रोज़ाना बदल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.