ICICI प्रूडेंशियल फ्लोटिंग इंटरेस्ट फंड ने फ्लोटिंग-रेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में 1 साल का टॉप रिटर्न दिया है, जो **6.2%** CAGR रहा। HDFC और आदित्य बिड़ला सन लाइफ फंड **5.9%** रिटर्न के साथ पीछे रहे। ये आंकड़े **₹1,500 करोड़** से ज़्यादा एसेट वाले फंड्स के परफॉरमेंस को दर्शाते हैं।
Detailed Coverage
फ्लोटिंग-रेट डेट फंड्स में परफॉरमेंस का अंतर
पिछले एक साल में फ्लोटिंग-रेट डेट फंड कैटेगरी में परफॉरमेंस का एक बड़ा अंतर देखने को मिला है। ICICI प्रूडेंशियल फ्लोटिंग इंटरेस्ट फंड ने 6.2% के कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के साथ सबसे अच्छा प्रदर्शन किया है। म्यूचुअल फंड की यह कैटेगरी उन डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करती है जहाँ ब्याज दरें फिक्स्ड नहीं होतीं और समय-समय पर बदलती रहती हैं। जब मार्केट में ब्याज दरें बदल रही हों, तो यह स्ट्रक्चर इन फंड्स को रिस्क मैनेज करने में मदद करता है।
पहले पायदान पर रहने वाले ICICI प्रूडेंशियल फंड के बाद, HDFC फ्लोटिंग रेट डेट फंड और आदित्य बिड़ला सन लाइफ फ्लोटिंग रेट फंड दोनों ने इसी एक साल की अवधि में 5.9% का रिटर्न दर्ज किया। ये रैंकिंग, जो ₹1,500 करोड़ या उससे ज़्यादा की एसेट बेस वाले फंड्स पर केंद्रित हैं, 21 जुलाई 2026 तक के परफॉरमेंस डेटा को दर्शाती हैं।
फंड का साइज़ और परफॉरमेंस के ट्रेंड्स
जहाँ एक साल का रिटर्न हालिया परफॉरमेंस की एक झलक देता है, वहीं फंड के कॉर्पस (एसेट) का साइज़ भी निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण फैक्टर होता है। टॉप फंड्स में, HDFC फ्लोटिंग रेट डेट फंड ₹16,451.6 करोड़ का बड़ा कॉर्पस मैनेज कर रहा है, जो इस कैटेगरी के योग्य फंड्स में सबसे बड़ा है।
परफॉरमेंस में कंसिस्टेंसी (स्थिरता) अलग-अलग टाइमफ्रेम पर काफी अलग हो सकती है। उदाहरण के लिए, ICICI प्रूडेंशियल फंड ने एक साल में अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं कोटक फ्लोटिंग रेट फंड जैसे अन्य फंड्स ने छोटी अवधि में बेहतर रिटर्न दिखाया। इसने एक महीने में 0.7% और तीन महीनों में 1.7% का रिटर्न दिया। तीन साल के लंबे नज़रिए से देखें तो, HDFC फ्लोटिंग रेट डेट फंड ने 7.6% CAGR दर्ज किया, जो दर्शाता है कि मार्केट की अलग-अलग कंडीशंस के आधार पर अलग-अलग फंड्स के फायदे हो सकते हैं।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
फ्लोटिंग-रेट फंड्स को देखने वाले निवेशक अक्सर स्टेबिलिटी (स्थिरता) और फंड मैनेजर की ब्याज दरों में होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने की क्षमता को प्राथमिकता देते हैं। चूंकि ये फंड्स वेरिएबल रेट्स से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका परफॉरमेंस व्यापक डेट मार्केट और पॉलिसी रेट के फैसलों से काफी हद तक जुड़ा होता है। इन फंड्स की समीक्षा करते समय, केवल हालिया रिटर्न से आगे बढ़कर यह देखना उपयोगी है कि फंड ने विभिन्न मार्केट साइकिल्स में कैसा प्रदर्शन किया है। निवेशक अपने अगले रिव्यू में फंड की पोर्टफोलियो क्रेडिट क्वालिटी और एक्सपेंस रेशियो (खर्च का अनुपात) की भी जांच कर सकते हैं, क्योंकि ये फैक्टर यूनिट होल्डर्स को मिलने वाले नेट रिटर्न में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
