ICICI Pru Cycle Fund: 5 साल में दमदार **18.47%** CAGR! निवेशकों की बल्ले-बल्ले

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ICICI Pru Cycle Fund: 5 साल में दमदार **18.47%** CAGR! निवेशकों की बल्ले-बल्ले
Overview

ICICI Prudential Business Cycle Fund ने अपने 5 साल पूरे कर लिए हैं और इस दौरान इसने निवेशकों को मालामाल कर दिया है। फंड ने Nifty 500 TRI को पीछे छोड़ते हुए दमदार रिटर्न दिया है, जहाँ ₹10,000 की मासिक SIP ने करीब **₹9.74 लाख** का आंकड़ा पार किया है।

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निवेशकों के लिए अच्छी खबर! ICICI Prudential Business Cycle Fund ने जनवरी 2021 में लॉन्च होने के बाद अपने 5 साल पूरे कर लिए हैं और इस दौरान इसने अपने बेंचमार्क Nifty 500 TRI को कड़ी टक्कर देते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। इस फंड ने लगातार 5 साल में 18.47% का सालाना कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दिया है, जहाँ ₹10,000 की मासिक SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) करीब ₹9.74 लाख तक पहुँच गई। वहीं, बेंचमार्क का CAGR 13.11% रहा। अगर आपने एकमुश्त निवेश (Lump-sum) किया था, तो ₹1 लाख का निवेश बढ़कर ₹2.51 लाख हो गया, जो 20.06% CAGR के बराबर है, जबकि बेंचमार्क पर यह ₹2.06 लाख (15.47% CAGR) रहा। फंड की NAV (नेट एसेट वैल्यू) ₹25.82 (10 फरवरी 2026 तक) है। इस शानदार प्रदर्शन का राज़ फंड की स्ट्रैटेजिक सेक्टर रोटेशन (Strategic Sector Rotation) यानी आर्थिक चक्र के हिसाब से अलग-अलग सेक्टर्स में निवेश को बदलना है। फंड मुख्य रूप से फाइनेंसियल, ऑटोमोबाइल, कंस्ट्रक्शन और इंडस्ट्रियल जैसे डोमेस्टिक-फेसिंग सेक्टर्स पर ध्यान केंद्रित करता है।

यह फंड ऐसे समय में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है जब भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत ग्रोथ दिखा रही है। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7-7.5% की ग्रोथ का अनुमान है, ऑटो सेक्टर 6-8% की रफ्तार से बढ़ सकता है, और फाइनेंसियल सर्विसेज में 11.5-12.5% तक का क्रेडिट ग्रोथ दिख सकता है। सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर भी इंडस्ट्रियल और कंस्ट्रक्शन से जुड़े सेक्टर्स के लिए फायदेमंद है। भारतीय अर्थव्यवस्था की 6.9% ग्रोथ का अनुमान इस फंड के लिए एक मजबूत आधार तैयार करता है। वहीं, बेंचमार्क Nifty 500 TRI का P/E रेश्यो 24.1 है और इसका 5-साल का CAGR लगभग 13.7% है। हालांकि, इस फ्लेक्सी-कैप स्पेस में Quant Flexi Cap ( 24.8% 5-yr rolling returns) और Parag Parikh Flexi Cap ( 21.5% 5-yr rolling returns) जैसे फंड्स भी मजबूत हैं। ICICI Prudential Business Cycle Fund का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेंट) दिसंबर 2025 तक करीब ₹15,958 करोड़ रुपये था, जो इसे एक मीडियम साइज़ का फंड बनाता है, वहीं इसका एक्सपेंस रेश्यो 0.74% से 1.68% के बीच रहा है।

फंड के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीआईओ (CIO) एस. नरेन (S. Naren) का मानना है कि मौजूदा मार्केट एक 'बोरिंग साइकिल' (boring cycle) में है और रिटर्न की उम्मीदें थोड़ी कम हैं। वे निवेशकों को धैर्य रखने और इक्विटी में अपना एलोकेशन बढ़ाने की सलाह देते हैं, लेकिन साथ ही डेट इंस्ट्रूमेंट्स (debt instruments) के साथ संतुलन बनाए रखने को भी कहते हैं। वे मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स पर सावधानी बरतने और लार्ज-कैप व हाइब्रिड फंड्स को प्राथमिकता देने की बात कहते हैं। फंड की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह आर्थिक चक्रों और सेक्टर्स के अनुमान पर काफी निर्भर करता है। अगर चक्र उम्मीदों के मुताबिक नहीं चला या सेक्टर्स में अचानक बदलाव आया, तो फंड का प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है। डोमेस्टिक-फेसिंग सेक्टर्स पर अधिक ध्यान देने के कारण यह आर्थिक मंदी या नीतियों में अचानक बदलाव के प्रति संवेदनशील हो सकता है। एस. नरेन की 'बोरिंग साइकिल' की बात यह भी इशारा करती है कि पिछला शानदार प्रदर्शन दोहराना मुश्किल हो सकता है। साथ ही, अलग-अलग प्लान्स के एक्सपेंस रेश्यो पर भी निवेशकों को ध्यान देना चाहिए।

भविष्य में इस फंड की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि यह कितनी सटीकता से आर्थिक चक्रों और सेक्टर रोटेशन का अनुमान लगा पाता है। भारत की मजबूत ग्रोथ का माहौल इसके लिए अनुकूल है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितताएं और महंगाई जैसे फैक्टर भी नजर रखने लायक हैं। निवेशकों को इस फंड की एक्टिव मैनेजमेंट फीस और आर्थिक ट्रेंड्स के अनुमान पर आधारित स्ट्रैटेजी के रिस्क को समझना चाहिए, खासकर जब फंड मैनेजर खुद ही रिटर्न को लेकर सतर्क हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.