ब्रोकरेज फर्म CLSA का भरोसा
ICICI Prudential AMC (IPRU) को लेकर एनालिस्ट्स का रुख पॉजिटिव बना हुआ है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म CLSA ने हाल ही में कंपनी पर 'Outperform' रेटिंग जारी की और शेयर के लिए ₹3,500 का टारगेट प्राइस तय किया है। यह टारगेट हालिया क्लोजिंग प्राइस ₹3,140 से करीब 11% ऊपर है। CLSA के अलावा HSBC और Bernstein जैसी फर्मों ने भी पहले सकारात्मक आउटलुक जताया है।
AUM ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी की कहानी
कंपनी की मजबूत एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) एनालिस्ट्स को लुभा रही है। इंडस्ट्री में चल रहे पॉजिटिव ट्रेंड्स और कंपनी के हाई-इक्विटी फंड मिक्स का इसे सीधा फायदा मिल रहा है। CLSA ने IPRU को भारतीय एसेट मैनेजमेंट सेक्टर में लीडिंग पोजिशन पर रखा है, जिसका मार्केट शेयर 13% है और एक्टिवली मैनेज्ड एयूएम (AUM) सबसे बड़ा है। कंपनी की हाई इक्विटी मिक्स के चलते 50 basis points के इंडस्ट्री-लीडिंग नेट रेवेन्यू यील्ड्स और करीब 35 basis points के ऑपरेटिंग प्रॉफिट यील्ड्स देखने को मिलते हैं। ब्रोकरेज फर्म FY28 तक AUM में 18% का सीएजीआर (CAGR) और प्रॉफिट आफ्टर टैक्स (PAT) में 16% का सीएजीआर (CAGR) रहने का अनुमान लगा रही है।
इंडस्ट्री का कैसा है हाल?
भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री पिछले एक दशक में करीब 20% सालाना की दर से बढ़ी है, जिससे कुल एयूएम (AUM) ₹82 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह सभी कंपनियों के लिए एक बड़ा बूस्ट है। ICICI Prudential AMC एक्टिवली मैनेज्ड फंड्स, खासकर इक्विटी-फोक्स्ड फंड्स पर जोर दे रही है, जिससे उन्हें पैसिव प्रोडक्ट्स की तुलना में बेहतर यील्ड्स मिल रहे हैं।
वैल्यूएशन और कंपटीशन पर सवाल?
हालांकि, इस साल स्टॉक में 19% की जबरदस्त तेजी ने इसके वैल्यूएशन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह तेजी सस्टेनेबल है? इस पर बहस जारी है। HDFC AMC और Nippon India Mutual Fund जैसे बड़े प्लेयर्स से कंपटीशन भी बढ़ रहा है, जो अपने एयूएम (AUM) और प्रोडक्ट रेंज का तेजी से विस्तार कर रहे हैं।
एनालिस्ट्स का बहुमत 'खरीद' के पक्ष में
कुल मिलाकर, 15 में से 14 एनालिस्ट्स IPRU पर 'Buy' रेटिंग दे रहे हैं। लेकिन 19% की तेजी के बाद, प्रॉफिट-टेकिंग (profit-taking) का खतरा बढ़ जाता है। कंपनी को अपने 18% AUM सीएजीआर (CAGR) के अनुमान को बनाए रखने के लिए बढ़ते कंपटीशन और मार्केट की अनिश्चितताओं से निपटना होगा। रेगुलेटरी बदलाव या मैक्रोइकॉनॉमिक अनसर्टेनिटीज (macroeconomic uncertainties) भी यील्ड्स पर असर डाल सकती हैं।
