सितंबर के बाजार में भारी उथल-पुथल के बीच Hybrid Long-Short फंड्स ने औसतन **0.71%** का रिटर्न दिया है। हालांकि, यह चमक केवल चुनिंदा फंड्स की वजह से है, जो यह बताती है कि कैटेगरी से ज्यादा फंड मैनेजर का चुनाव अहम है।
सितंबर 2026 में जब शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखी गई, तो Hybrid Long-Short फंड्स ने निवेशकों के लिए स्थिरता का काम किया। जहां निफ्टी 50 और निफ्टी मिडकैप 150 इंडेक्स में क्रमशः 6.06% और 7.09% की गिरावट आई, वहीं इस कैटेगरी ने औसतन 0.71% का रिटर्न दर्ज किया।
आंकड़ों का असली सच
भले ही कैटेगरी का औसत पॉजिटिव रहा, लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। डेटा के अनुसार, इन फंड्स का मीडियन रिटर्न -0.10% रहा, जिसका मतलब है कि आधे से ज्यादा फंड्स ने मुनाफा नहीं कमाया। कुल 11 फंड्स में से केवल 5 ही ऐसे थे जिन्होंने बढ़त हासिल की।
टॉप परफॉरमेंस की कहानी
इस कैटेगरी का औसत बढ़ाने में Quant Asset Management के qSIF Hybrid फंड का बड़ा हाथ रहा, जिसने अकेले 16.91% का शानदार रिटर्न दिया। इसके मुकाबले अन्य फंड्स जैसे Arudha Hybrid, Infinity Hybrid, Prism Hybrid और RedHex Hybrid ने 0.21% से 0.53% के बीच मामूली रिटर्न दिया।
ये फंड्स जोखिम कैसे कम करते हैं?
ये फंड्स पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स से अलग होते हैं। ये तीन तरह के टूल्स का इस्तेमाल करते हैं: ग्रोथ के लिए स्टॉक्स रखना, बाजार गिरने पर 'शॉर्ट' पोजीशन लेना और एक हिस्सा डेट (Debt) में निवेश करना। यह रणनीति बाजार की गिरावट में सुरक्षा कवच का काम करती है।
मैनेजर का चुनाव क्यों है जरूरी?
ये नतीजे साबित करते हैं कि सिर्फ 'हाइब्रिड' लेबल देखकर निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। परफॉरमेंस पूरी तरह मैनेजर की स्किल्स और हेजिंग स्ट्रैटेजी पर निर्भर करती है। आने वाले समय में बॉन्ड यील्ड और ग्लोबल टेंशन को देखते हुए निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या ये फंड्स अपनी रक्षात्मक स्थिति बनाए रख पाते हैं या नहीं।
