Hybrid Funds: निवेशकों ने बदली रणनीति! ₹1.55 लाख करोड़ इनफ्लो, जानिए क्यों?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Hybrid Funds: निवेशकों ने बदली रणनीति! ₹1.55 लाख करोड़ इनफ्लो, जानिए क्यों?
Overview

साल 2025-26 में निवेशकों ने हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स (Hybrid Mutual Funds) की तरफ भारी संख्या में रुख किया है। इन फंड्स ने **₹1.55 लाख करोड़** का नेट इनफ्लो आकर्षित किया है, जो पिछले साल से **29%** ज्यादा है। यह कदम वैश्विक अनिश्चितताओं और बाजार की अस्थिरता के बीच निवेशकों की सुरक्षा और संतुलित निवेश की चाहत को दर्शाता है।

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ग्लोबल अनिश्चितता और निवेशक का बदला मिजाज

मौजूदा ग्लोबल जियोपॉलिटिकल टेंशन, व्यापारिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के माहौल में, निवेशक अब सिर्फ शेयर (Equity) में ग्रोथ की बजाय मैनेज्ड रिस्क और पूंजी को सुरक्षित रखने को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। इस वजह से, हाइब्रिड फंड्स, जो एक ही फंड में अलग-अलग एसेट क्लास (जैसे इक्विटी, डेट, सोना) को मिलाकर निवेश करते हैं, निवेशकों की पहली पसंद बन गए हैं।

हाइब्रिड फंड्स में बंपर इनफ्लो

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान, हाइब्रिड म्यूचुअल फंड्स ने निवेशकों से जबरदस्त रुचि पाई और कुल ₹1.55 लाख करोड़ का नेट इनफ्लो हासिल किया। यह पिछले साल के मुकाबले 29% की बड़ी बढ़ोतरी है। मार्च 2026 तक, इन फंड्स की एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 17% बढ़कर ₹10.35 लाख करोड़ तक पहुंच गई। वहीं, निवेशक खातों की संख्या 34 लाख बढ़कर 1.9 करोड़ हो गई। यह शानदार इनफ्लो ऐसे समय में आया जब रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव और अन्य भू-राजनीतिक घटनाएं बाजार में खूब उथल-पुथल मचा रही थीं।

मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स की धूम

हाइब्रिड फंड्स की कैटेगरी में, मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स (Multi-Asset Allocation Funds) सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। इनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण इनकी स्थिरता (Stability) है। ये फंड्स आम तौर पर शेयर, डेट और सोने जैसी कमोडिटीज (Commodities) में पैसा लगाते हैं, जो बाजार में गिरावट आने पर एक सुरक्षा कवच का काम करते हैं। FY26 में सोने के शानदार प्रदर्शन ने भी ऐसे हाइब्रिड फंड्स को बूस्ट दिया जिनमें कीमती धातुओं का एक्सपोजर था। मल्टी-एसेट फंड्स की AUM में अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 65% से ज्यादा की बढ़ोतरी देखी गई। इससे पता चलता है कि निवेशक बाजार से पूरी तरह दूर भागने के बजाय, उसमें रहकर ही विविधीकरण (Diversification) को तरजीह दे रहे हैं। इस दौरान, स्थापित और ट्रैक रिकॉर्ड वाले फंड्स में ज्यादा निवेश हुआ, जबकि न्यू फंड ऑफर्स (NFOs) में अपेक्षाकृत कम दिलचस्पी दिखी।

विविधीकरण की अपनी सीमाएं

अपनी आकर्षकता के बावजूद, हाइब्रिड फंड्स भी बाजार की गिरावट से अछूते नहीं हैं। मार्च 2025 में गंभीर बाजार तनाव के दौरान इन फंड्स से कुल ₹946 करोड़ का आउटफ्लो हुआ था, जो निवेशकों की भावना में तेजी से बदलाव को दर्शाता है। हालांकि डेट कंपोनेंट कुछ हद तक सहारा देता है, लेकिन बढ़ती ब्याज दरें या क्रेडिट रिस्क इसे चुनौती दे सकते हैं। अमेरिका की प्रस्तावित टैरिफ नीतियां भी अनिश्चितता पैदा कर सकती हैं, खासकर उन सेक्टर्स के लिए जिनमें पोर्टफोलियो का एक्सपोजर है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जो मध्य पूर्व में अस्थिरता के कारण बढ़ी हैं, महंगाई का जोखिम बढ़ाती हैं और बाजार की समग्र भावना को प्रभावित कर सकती हैं। भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण मार्च 2026 में जब निफ्टी 50 (Nifty 50) और सेंसेक्स (Sensex) में तेज गिरावट आई, तो हाइब्रिड फंड्स भी इससे प्रभावित हुए। हालांकि, लंबे समय में ये फंड्स बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन अल्पावधि में इनका प्रदर्शन अस्थिर रह सकता है। कुछ फंड्स जैसे क्वांट मल्टी एसेट एलोकेशन फंड (Quant Multi Asset Allocation Fund) ने तीन साल में दमदार रिटर्न दिया, वहीं HDFC बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (HDFC Balanced Advantage Fund) ने एक विश्लेषण में एक साल में निगेटिव रिटर्न दिखाया। स्थापित फंड्स को तरजीह देना शायद जोखिम लेने की कम इच्छा या अनिश्चित समय में सिद्ध प्रदर्शन की मांग को दर्शाता है।

हाइब्रिड निवेश का भविष्य

हाइब्रिड फंड्स का भविष्य वैश्विक अनिश्चितताओं पर टिका रहेगा, लेकिन उम्मीदें फिलहाल सकारात्मक बनी हुई हैं। आर्बिट्रेज (Arbitrage), इक्विटी सेविंग्स (Equity Savings), बैलेंस्ड एडवांटेज (Balanced Advantage), एग्रेसिव हाइब्रिड (Aggressive Hybrid) और मल्टी-एसेट एलोकेशन जैसी कैटेगरी में निवेशकों की रुचि बनी रहने की उम्मीद है। हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का संभावित आउटफ्लो और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव वैल्यूएशंस को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार के भीतर विविधीकरण की बढ़ती प्राथमिकता यह दर्शाती है कि हाइब्रिड फंड्स कई निवेशकों के लिए एक मुख्य निवेश रणनीति बने रहेंगे। यह निरंतर इनफ्लो जोखिम प्रबंधन को ग्रोथ के साथ प्राथमिकता देने की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत देता है, जहां निवेशक जटिल बाजार चक्रों से निपटने में सक्षम फंड्स की तलाश कर रहे हैं।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.