HSBC म्यूचुअल फंड ने विदेशी स्कीमों में निवेश फिर से खोला, 18 अगस्त से कर सकेंगे निवेश

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
HSBC म्यूचुअल फंड ने विदेशी स्कीमों में निवेश फिर से खोला, 18 अगस्त से कर सकेंगे निवेश

HSBC म्यूचुअल फंड 18 अगस्त 2026 से अपनी तीन विदेशी स्कीमों में नए निवेश के लिए द्वार खोल रहा है। दिसंबर 2025 से बंद इन स्कीमों में अब निवेशक हर महीने प्रति पैन **₹2 लाख** तक का निवेश कर सकेंगे। यह कदम ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन के लिए अहम है, हालांकि निवेशकों को करेंसी के उतार-चढ़ाव और रेगुलेटरी लिमिट्स का ध्यान रखना होगा।

विदेशी निवेश फिर से शुरू

HSBC म्यूचुअल फंड ने अपनी तीन विदेशी स्कीमों में निवेश पर लगी रोक हटा दी है। अब निवेशक 18 अगस्त 2026 से इन स्कीमों में नया पैसा लगा सकेंगे। जिन स्कीमों में निवेश दोबारा शुरू हो रहा है, उनमें HSBC Asia Pacific (Ex Japan) Dividend Yield Fund, HSBC Brazil Fund और HSBC Global Emerging Markets Fund शामिल हैं।

क्यों लगी थी रोक?

फंड हाउस ने इन स्कीमों में दिसंबर 2025 से नया पैसा लेना बंद कर दिया था। इसकी वजह भारतीय रेगुलेटर्स द्वारा तय की गई विदेशी निवेश की सीमा का पूरा हो जाना था। जब म्यूचुअल फंड हाउस विदेशी निवेश की अपनी तय सीमा तक पहुंच जाते हैं, तो उन्हें अनुपालन बनाए रखने के लिए नए निवेश को रोकना पड़ता है। यह एसेट मैनेजमेंट इंडस्ट्री में एक आम प्रक्रिया है।

निवेश की नई सीमा

इनफ्लो को मैनेज करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे रेगुलेटरी लिमिट्स के भीतर रहें, फंड हाउस ने एक खास निवेश कैप लगाया है। निवेशक अब लंप-सम, एसआईपी (SIP) या स्विच-इन जैसे माध्यमों से निवेश कर सकते हैं, लेकिन यह ₹2 लाख प्रति माह प्रति पैन (PAN) तक सीमित रहेगा।

ग्लोबल डाइवर्सिफिकेशन और जोखिम

यह निवेशकों के लिए अपने पोर्टफोलियो में भौगोलिक विविधता लाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। विदेशी बाजारों में निवेश करने से उन्हें विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं और करेंसी जोन में एक्सपोजर मिल सकता है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय फंडों में घरेलू इक्विटी फंडों से अलग जोखिम भी होते हैं। इनमें करेंसी की अस्थिरता शामिल है, जहां भारतीय रुपये के मुकाबले विदेशी करेंसी की चाल रिटर्न को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, भू-राजनीतिक जोखिम और उन देशों के मार्केट वैल्यूएशन भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं, जहां फंड निवेश करता है। निवेशकों को अंतरराष्ट्रीय म्यूचुअल फंड के टैक्सेशन स्ट्रक्चर की भी समीक्षा करनी चाहिए, क्योंकि ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स के लिए टैक्स नियम घरेलू फंडों से भिन्न हो सकते हैं।

विलय का भी हुआ था असर

निवेशक यह भी ध्यान दें कि इस साल की शुरुआत में, फंड हाउस ने 25 मार्च 2026 से HSBC Global Equity Climate Change Fund of Fund को HSBC Global Emerging Markets Fund में मर्ज कर दिया था।

आगे क्या?

नए निवेश स्वीकार करने की क्षमता रेगुलेटरी विदेशी निवेश सीमा के भीतर उपलब्ध जगह पर निर्भर करेगी। यदि इनफ्लो तेजी से बढ़ता है और फिर से अनुमत सीमा तक पहुंच जाता है, तो फंड हाउस को भविष्य में इन सीमाओं को समायोजित करने या अस्थायी रूप से सब्सक्रिप्शन को प्रतिबंधित करने की आवश्यकता हो सकती है। इसलिए, निवेशकों को निवेश स्लॉट की उपलब्धता के संबंध में फंड हाउस के आधिकारिक संचार पर नज़र रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.