HSBC Mutual Fund के CIO वेणुगोपाल मंगत ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे अब मार्केट के वैल्युएशन बढ़ने का इंतज़ार करने के बजाय उन कंपनियों पर ध्यान दें जिनकी अर्निंग ग्रोथ दमदार है।
भारतीय शेयर बाजार अब एक ऐसे मोड़ पर है जहां निवेशक केवल 'वैल्युएशन री-रेटिंग' के भरोसे नहीं रह सकते। HSBC Mutual Fund के CIO वेणुगोपाल मंगत का मानना है कि अब मार्केट में पैसा बनाने के लिए कंपनियों की ऑर्गेनिक अर्निंग ग्रोथ और कैश-फ्लो को देखना सबसे जरूरी हो गया है। मौजूदा आर्थिक माहौल में इंडेक्स-वाइड ट्रेंड्स के बजाय स्टॉक पिकिंग (Stock Selection) की अहमियत बढ़ गई है।
बैंकिंग सेक्टर और प्राइवेट बैंक
प्राइवेट बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर संस्थागत निवेशकों (Institutional Investors) का भरोसा अभी भी कायम है। हालांकि इनके वैल्युएशन थोड़े महंगे लग सकते हैं, लेकिन मजबूत डिपॉजिट बेस और हेल्दी बैलेंस शीट इन्हें पब्लिक सेक्टर बैंकों के मुकाबले बेहतर बनाती है। भारत में क्रेडिट ग्रोथ का चक्र जारी है, ऐसे में प्राइवेट लेंडर्स के लिए अपने अंडरराइटिंग स्टैंडर्ड्स को बनाए रखना मुनाफे (Profit Margins) की रक्षा के लिए बेहद अहम होगा।
स्मॉल और मिडकैप का गणित
स्मॉल और मिडकैप (SMID) सेगमेंट में इन दिनों काफी हलचल है। वेणुगोपाल मंगत के अनुसार, इस पूरे स्पेस को एक नजरिए से नहीं देखा जा सकता। कई शेयर तो ऐसे हैं जो भविष्य की 4-5 साल की ग्रोथ को आज ही डिस्काउंट कर रहे हैं, जिससे रिस्क बढ़ जाता है। इसलिए इस सेक्टर में बेहद सिलेक्टिव रहने की जरूरत है।
कहाँ हैं निवेश के मौके?
इन्वेस्टमेंट का फोकस अब डोमेस्टिक साइकल्स (Domestic Cyclicals) पर शिफ्ट हो रहा है। कैपिटल गुड्स, पावर और डिफेंस जैसे सेक्टर में कैपेसिटी यूटिलाइजेशन बढ़ रहा है, जो प्राइवेट कैपिटल स्पेंडिंग साइकिल को सहारा दे रहा है। इसके अलावा, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) से रिटेल सेक्टर को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।
अंत में, रिटेल निवेशकों का अनुशासन—जो SIP के जरिए लगातार निवेश कर रहे हैं—भारतीय बाजार के लिए एक बड़ा स्ट्रक्चरल सपोर्ट बना हुआ है। अब निवेशकों के लिए सबसे बड़ी मॉनिटरेबल चीज तिमाही नतीजों में निरंतरता और कंपनियों की प्रॉफिट मार्जिन बचाने की क्षमता होगी।
