मार्च 2026 तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी घटकर **59.5%** रह गई है, जो दो साल पहले **62.2%** थी। बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण पोर्टफोलियो वैल्यू कम हुई है, जबकि रईस निवेशक (HNI) अब अधिक सुरक्षित एसेट्स की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
रिटेल शेयर में गिरावट की असल वजह
रिटेल निवेशकों की हिस्सेदारी में कमी का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि छोटे निवेशकों ने पैसा लगाना बंद कर दिया है। SIP के जरिए निवेश का सिलसिला लगातार जारी है। असल समस्या बाजार के उतार-चढ़ाव की है। रिटेल निवेशकों का एक बड़ा हिस्सा स्मॉल और मिड-कैप शेयरों में लगा था, जिनमें सितंबर 2024 के बाद भारी गिरावट देखी गई। पोर्टफोलियो की वैल्यू गिरने से कुल एसेट बेस में रिटेल निवेशकों का प्रतिशत अपने आप कम हो गया है।
HNI निवेशकों का बढ़ता रुझान
दूसरी तरफ, ₹2 लाख से अधिक का ट्रांजैक्शन करने वाले हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNI) की हिस्सेदारी मार्च 2024 के 32.3% से बढ़कर मार्च 2026 में 32.7% पर पहुंच गई है। वेल्थ मैनेजर्स के मुताबिक, ये निवेशक अब 'वेल्थ प्रिजर्वेशन' यानी अपनी पूंजी बचाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं और पैसिव इन्वेस्टमेंट की ओर रुख कर रहे हैं।
पैसिव और सुरक्षित एसेट्स की ओर शिफ्ट
बड़े निवेशक अब इंडेक्स फंड्स और ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि बाजार के रिस्क को कम किया जा सके। इसके अलावा, सुरक्षित निवेश के तौर पर गोल्ड और सिल्वर ETFs का क्रेज तेजी से बढ़ा है। इनका कुल एसेट साइज ₹2.60 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है। जानकारों का कहना है कि जहां बड़े निवेशक खुद को बचाने के लिए इन डिफेंसिव एसेट्स का सहारा ले रहे हैं, वहीं रिटेल पोर्टफोलियो अभी भी बाजार की अस्थिरता के प्रति ज्यादा संवेदनशील बने हुए हैं।
