HDFC Mid Cap Fund ने एक बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। फंड का एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) **₹1 लाख करोड़** के पार पहुंच गया है, जिससे यह अपनी कैटेगरी का सबसे बड़ा फंड बन गया है। दो दशक से अधिक के सफर में यह फंड लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहा है।
दो दशक का सफल सफर
HDFC Mutual Fund की यह स्कीम जून 2007 में लॉन्च हुई थी और तब से इसका मैनेजमेंट Chirag Setalvad ही कर रहे हैं, जो HDFC AMC में इक्विटी के हेड हैं। फंड मैनेजमेंट की यह स्थिरता इसकी लंबी अवधि की निवेश रणनीति का अहम हिस्सा रही है। फंड बॉटम-अप अप्रोच पर काम करता है और मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से 101वें से 250वें नंबर की कंपनियों पर फोकस करता है। इसका पोर्टफोलियो टर्नओवर रेशियो ऐतिहासिक रूप से 5% से 20% के बीच रहा है, जो कि एक 'बाय-एंड-होल्ड' फिलॉसफी को दर्शाता है। फंड मैनेजर बड़ी मात्रा में कैश रखने की बजाय ज्यादातर फंड को इन्वेस्टेड रखना पसंद करते हैं।
परफॉरमेंस में आई शानदार तेजी
हालांकि, 2016 से 2021 के बीच फंड ने कुछ समय के लिए अपने बेंचमार्क इंडेक्स से पीछे प्रदर्शन किया था, लेकिन इसके बाद फंड की परफॉरमेंस में जबरदस्त रिकवरी देखी गई है। हाल के वर्षों में, फंड ने अपने बेंचमार्क Nifty Midcap 150 – TRI और कैटेगरी के औसत से लगातार 2% से 3% बेहतर रिटर्न दिया है। शार्प और सॉर्टिनो रेशियो जैसे रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न के मामले में भी यह अपने प्रतिस्पर्धियों से बेहतर रहा है, जो यह बताता है कि फंड ने उतार-चढ़ाव के दौरान भी बेहतर मैनेजमेंट किया है।
पोर्टफोलियो की खास बातें
जून 2026 तक, फंड का पोर्टफोलियो 76 स्टॉक्स में फैला हुआ है। किसी एक स्टॉक में 5% से ज्यादा एक्सपोजर न रखकर जोखिम को मैनेज किया जाता है। फंड की सेक्टर प्राथमिकताएं बैंकिंग, ऑटो एंसिलरीज, हेल्थकेयर, फाइनेंस, आईटी और कंजम्पशन सेक्टर हैं, जो कुल संपत्ति का 67.4% बनाते हैं। फंड को कम से कम 65% मिड-कैप कंपनियों में निवेश करना होता है, लेकिन वर्तमान में इसमें 63.2% मिड-कैप, 10.7% लार्ज-कैप और 18.2% स्मॉल-कैप स्टॉक्स शामिल हैं।
निवेशकों के लिए यह देखना अहम होगा कि क्या फंड बड़ी एसेट बेस के साथ मिड-कैप शेयरों की लिक्विडिटी की चुनौतियों का सामना करते हुए अपने हालिया शानदार प्रदर्शन को जारी रख पाता है या नहीं।
