HDFC फ्लोटिंग रेट डेट फंड ने पिछले छह महीनों में **3.4%** का शानदार रिटर्न दिया है, जो इस कैटेगरी के दूसरे फंड्स से बेहतर है। यह फंड **₹16,400 करोड़** से ज़्यादा की बड़ी असेट बेस को मैनेज करता है और एक और तीन साल की अवधि में अपने बेंचमार्क के मुकाबले लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।
HDFC फ्लोटिंग रेट डेट फंड क्यों है नंबर वन?
ACE MF के 28 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, HDFC फ्लोटिंग रेट डेट फंड ने फ्लोटिंग-रेट म्यूचुअल फंड कैटेगरी में पिछले छह महीनों में 3.4% का सबसे बेहतरीन रिटर्न दिया है। इसने ICICI Prudential Floating Interest Fund (जिसने 3.4% रिटर्न दिया) और Aditya Birla SL Floating Rate Fund (जिसने 3.3% रिटर्न दिया) जैसे बड़े फंड्स को भी पीछे छोड़ दिया है। यह तुलना उन फंड्स के लिए की गई है जिनका असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) यानी निवेशकों द्वारा जमा की गई कुल राशि ₹1,500 करोड़ से ज़्यादा है।
फ्लोटिंग-रेट फंड्स कैसे काम करते हैं?
फ्लोटिंग-रेट फंड्स ऐसे डेट स्कीम्स होते हैं जो मुख्य रूप से ऐसे बॉन्ड्स में निवेश करते हैं जिनकी ब्याज दरें बदलती रहती हैं। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो इन फंड्स को फायदा होता है क्योंकि उनके बॉन्ड होल्डिंग्स पर मिलने वाला ब्याज बढ़ जाता है, जिससे निवेशकों को ज़्यादा रिटर्न मिल सकता है। हालांकि, जब ब्याज दरें स्थिर रहती हैं या गिरती हैं, तो इन फंड्स का प्रदर्शन फिक्स्ड-इनकम फंड्स से अलग हो सकता है।
फंड का प्रदर्शन और भविष्य का नज़रिया
₹16,451.6 करोड़ के कॉर्पस के साथ, HDFC फंड इस कैटेगरी के टॉप पांच फंड्स में सबसे बड़ा असेट साइज़ रखता है। हाल की बढ़त के अलावा, फंड ने अपने बेंचमार्क के मुकाबले लगातार अच्छा प्रदर्शन दिखाया है। एक साल की अवधि में, फंड ने अपने बेंचमार्क को 3.4% पॉइंट्स से पीछे छोड़ दिया, जबकि बेंचमार्क इंडेक्स ने 2.6% का रिटर्न दर्ज किया था। तीन साल की अवधि में भी यही ट्रेंड जारी रहा, जहां फंड ने 7.6% का रिटर्न दिया, जो बेंचमार्क के 6.9% से 0.7% पॉइंट्स ज़्यादा था।
हालांकि, डेट फंड्स का प्रदर्शन समय के साथ बदलता रहता है। उदाहरण के लिए, जहां HDFC फंड ने छह महीने और तीन साल की अवधि में बढ़त बनाई, वहीं Aditya Birla SL Floating Rate Fund ने एक महीने में सबसे ज़्यादा 0.6% का रिटर्न दिया। इसी तरह, Nippon India Floater Fund ने तीन महीने की अवधि में 2.0% रिटर्न के साथ टॉप स्थान हासिल किया।
निवेशकों के लिए, यह बदलता परिदृश्य अलग-अलग समय-सीमाओं पर प्रदर्शन देखने के महत्व को बताता है। जो फंड अल्पावधि में अच्छा प्रदर्शन करता है, वह ज़रूरी नहीं कि लंबी अवधि में भी अपनी बढ़त बनाए रखे। ऐसे डेट फंड्स का मूल्यांकन करते समय, निवेशक अक्सर देखते हैं कि फंड कितनी लगातार अपने बेंचमार्क को मात देता है, उसके पोर्टफोलियो में बॉन्ड्स की क्वालिटी क्या है, और फंड का एक्सपेंस रेशियो क्या है, जो निवेशक को मिलने वाले नेट रिटर्न को प्रभावित करता है। यह देखना अहम होगा कि ब्याज दरें बदलने पर ये फंड्स कैसा प्रदर्शन करते हैं।
