HDFC Flexi Cap Fund के पास अब **₹1.13 लाख करोड़** का विशाल एसेट बेस है। फंड ने पिछले 1 साल में **4%** की गिरावट देखी है और अब बेहतर ग्रोथ के लिए मिड-कैप शेयरों की ओर रुख कर रहा है।
भारत की सबसे बड़ी इक्विटी स्कीमों में से एक, HDFC Flexi Cap Fund के सामने इस समय अपने विशाल साइज को संभालने की बड़ी चुनौती है। अक्टूबर 2026 तक फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹1.13 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है। इतने बड़े स्तर पर निवेश करने का मतलब है 'लिक्विडिटी' की समस्या, जहां बड़े सौदे करने पर मार्केट की कीमतों में अचानक हलचल होने का जोखिम बढ़ जाता है।
परफॉर्मेंस का लेखा-जोखा
फंड मैनेजर अमित गणात्रा की देखरेख में फंड ने लंबी अवधि में अपनी मजबूती बनाए रखी है। स्कीम ने पिछले 3 साल और 5 साल में क्रमशः 14% और 15% का CAGR रिटर्न दिया है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म में तस्वीर थोड़ी धुंधली है। पिछले एक साल में फंड ने लगभग 4% का नेगेटिव रिटर्न दिया है, जो यह दर्शाता है कि बड़ा साइज होने के कारण फंड को उतनी फुर्ती से काम करने में मुश्किल हो रही है, जितनी छोटे फंड्स को होती है।
नई रणनीति: मिड-कैप पर दांव
इस सुस्ती से निपटने के लिए, फंड मैनेजर अब मिड-कैप शेयरों में ज्यादा निवेश कर रहे हैं। लार्ज-कैप स्पेस में ग्रोथ के सीमित अवसरों को देखते हुए, यह फंड अब टॉप 100 कंपनियों के बाहर भी मौके तलाश रहा है, ताकि फंड को पुरानी फ्लेक्सिबिलिटी वापस मिल सके।
बैंकिंग सेक्टर में भारी निवेश
मिड-कैप की तरफ शिफ्ट होने के बावजूद, पोर्टफोलियो अब भी बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विसेज पर टिका है। फंड की टॉप होल्डिंग्स में HDFC Bank, ICICI Bank, और Axis Bank शामिल हैं। इस कंसंट्रेशन का मतलब यह है कि बैंकिंग सेक्टर में आने वाले उतार-चढ़ाव सीधे इस फंड के प्रदर्शन को प्रभावित करते हैं।
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि इसका एक्सपेंस रेशियो 57 बेसिस पॉइंट्स पर बना हुआ है, जो इसे किफायती बनाता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या फंड की यह नई मिड-कैप रणनीति इतने बड़े एसेट बेस के साथ लिक्विडिटी की चुनौतियों को मात दे पाती है या नहीं।
