HDFC Defence Fund का जलवा! 3 साल में दिया **39.2%** का ज़बरदस्त रिटर्न, बना नंबर 1

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
HDFC Defence Fund का जलवा! 3 साल में दिया **39.2%** का ज़बरदस्त रिटर्न, बना नंबर 1

HDFC Defence Fund ने बाज़ार में अपनी धाक जमा दी है! पिछले 3 सालों में **39.2%** का शानदार सालाना रिटर्न देकर यह फंड थीमैटिक म्यूचुअल फंड्स (Thematic Mutual Funds) में नंबर 1 बन गया है। **₹10,500 करोड़** से ज़्यादा की एसेट बेस के साथ, इस फंड ने अपने बेंचमार्क इंडेक्स को काफी पीछे छोड़ दिया है।

Detailed Coverage

3 साल में 39.2% का ज़बरदस्त रिटर्न!

ACE MF के 27 जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, HDFC Defence Fund ने तीन साल की कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) के मामले में टॉप पोजिशन हासिल की है। इसने 39.2% का ज़बरदस्त रिटर्न दिया है। इसी अवधि में, SBI PSU Fund ने 23.2% और Aditya Birla SL PSU Equity Fund ने 22.2% का रिटर्न दर्ज किया।

सबसे बड़ा फंड, सबसे बेहतर परफॉरमेंस

यह फंड फिलहाल ₹10,529.2 करोड़ का कॉर्पस मैनेज कर रहा है, जो कि ₹1,500 करोड़ की मिनिमम एसेट साइज़ की शर्त पूरी करने वाले टॉप 5 थीमैटिक फंड्स में सबसे बड़ा है। इस शानदार परफॉरमेंस की एक बड़ी वजह यह है कि HDFC Defence Fund अपने बेंचमार्क इंडेक्स से काफी आगे निकल गया है। तीन साल की अवधि में, इसने बेंचमार्क इंडेक्स के 8.2% रिटर्न की तुलना में 31.1% ज़्यादा रिटर्न दिया। एक साल की अवधि में भी, फंड ने 24.8% का रिटर्न दर्ज किया, जबकि बेंचमार्क 2.3% नीचे गिरा।

थीमैटिक फंड्स की वोलेटिलिटी (Volatility)

हालांकि, HDFC Defence Fund ने लंबी अवधि में बेहतरीन प्रदर्शन किया है, लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि थीमैटिक फंड्स सेक्टर-स्पेसिफिक ट्रेंड्स के कारण काफी अस्थिर (volatile) हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, हाल के एक महीने की अवधि में, ICICI Pru Transportation and Logistics Fund 3.1% रिटर्न के साथ लीडर बनकर उभरा। इसका मतलब है कि सेक्टर-स्पेसिफिक फंड्स का प्रदर्शन सरकारी नीतियों, डिफेंस कंपनियों के ऑर्डर इनफ्लो और ग्लोबल सप्लाई चेन की स्थितियों के आधार पर बदलता रहता है।

रिस्क और भविष्य की राह

थीमैटिक फंड्स, अपने स्वभाव के अनुसार, किसी खास सेक्टर में ही निवेश करते हैं, जिससे डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स की तुलना में ज़्यादा रिस्क हो सकता है। जब डिफेंस कंपनियों को ऑर्डर एग्जीक्यूशन में देरी, लागत में बढ़ोतरी या सरकारी खरीद नीतियों में बदलाव जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तो इस स्पेस के थीमैटिक फंड्स पर ज़्यादा असर पड़ सकता है।

निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे केवल हालिया बड़ी गेंस पर ध्यान देने के बजाय, अलग-अलग समय अवधियों में रिटर्न की कंसिस्टेंसी पर नज़र रखें। भविष्य का प्रदर्शन सरकार द्वारा स्वदेशी रक्षा निर्माण पर जारी पूंजीगत खर्च और कंपनियों की ऑर्डर बुक को प्रभावी ढंग से निष्पादित करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगा। इन सेक्टर-फोक्स्ड निवेशों की साइक्लिकल प्रकृति को समझना लंबी अवधि की पोर्टफोलियो प्लानिंग के लिए महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.