HDFC Defence Fund ने पिछले 6 महीनों में **26.4%** का ज़बरदस्त रिटर्न दिया है। इसने Kotak Pioneer और Quant Quantamental जैसे फंड्स को पीछे छोड़ दिया है। **₹9,724.3 करोड़** की एसेट बेस वाला यह फंड लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है, हालांकि, ऐसे खास सेक्टर वाले फंड्स में रिस्क ज़्यादा होता है।
HDFC Defence Fund बनाThematic कैटेगरी का किंग
जनवरी 2026 के शुरुआती डेटा के मुताबिक, HDFC Defence Fund ने Thematic Mutual Fund कैटेगरी में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया है। पिछले छह महीनों में फंड ने 26.4% का रिटर्न दिया है, जो कि डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में आई तेज़ी का नतीजा है। इस अवधि में Kotak Pioneer Fund ने 6.9% और Quant Quantamental Fund ने 6.6% का रिटर्न दिया है।
फंड का साइज़ और मार्केट में पकड़
₹9,724.3 करोड़ के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ, HDFC Defence Fund इस कैटेगरी के टॉप 5 फंड्स में सबसे बड़ा है। डिफेंस सेक्टर में निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी साफ दिख रही है, जिसे सरकार की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने वाली पॉलिसीज़ का सपोर्ट मिल रहा है।
बेंचमार्क के मुकाबले प्रदर्शन
फंड ने अपने बेंचमार्क को भी पीछे छोड़ दिया है। एक साल में, HDFC Defence Fund ने बेंचमार्क के -4.0% के निगेटिव रिटर्न के मुकाबले 20.2% ज़्यादा यानी 16.2% का रिटर्न दिया है। तीन साल की बात करें तो फंड ने सालाना 42.8% का शानदार रिटर्न दिया है, जबकि बेंचमार्क सिर्फ 9.2% ही दे पाया। पिछले एक महीने में 8.0% और तीन महीनों में 30.1% का रिटर्न भी फंड की मजबूत पकड़ दिखाता है।
Thematic फंड्स के रिस्क को समझें
हालांकि फंड का हालिया प्रदर्शन शानदार है, निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि Thematic फंड्स में डाइवरसिफाइड इक्विटी फंड्स के मुकाबले ज़्यादा रिस्क होता है। यह फंड सिर्फ डिफेंस और उससे जुड़े सेक्टर की कंपनियों पर फोकस करता है, इसलिए यह पॉलिसी में बदलाव, सरकारी खर्च और कंपनियों के ऑर्डर एग्जीक्यूशन पर बहुत ज़्यादा निर्भर करता है। अगर डिफेंस सेक्टर को किसी भी तरह की परेशानी, जैसे रॉ मैटेरियल की बढ़ती कीमतें या बड़े सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में देरी, का सामना करना पड़ता है, तो फंड के रिटर्न में बड़ा उतार-चढ़ाव आ सकता है।
आगे चलकर, सरकारी डिफेंस प्रोक्योरमेंट बजट और फंड के पोर्टफोलियो की मुख्य कंपनियों के ऑर्डर एग्जीक्यूशन पर नज़र रखना अहम होगा। सेक्टर-स्पेसिफिक रेगुलेशन में बदलाव या ग्लोबल डिफेंस ट्रेड पॉलिसीज़ में फेरबदल भी फंड के भविष्य की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
